February 17, 2010

भारतीय मसालों का जवाब नहीं


भारतीय सब्जी में करी का अपना विशेष महत्व है। परिवार में जब किसी खास अवसर जैसे तीज त्योहार या किसी खास मौके पर भोजन बनता है या मेहमान भोजन पर आमंत्रित किए जाते हैं तब भोजन में करी की सब्जी को जरूर शामिल किया जाता है। अब आप कहेंगे कि करी ही की क्यों, ऐसे अवसरों पर तो और भी कई लज़ीज पकवान बनाए जाते हैं। आज करी की बात करने के पीछे कुछ खास बात है-
करी खाते वक्त भले ही हम मात्र इसे एक स्वाद के रुप में अपने भोजन में शामिल करते हैं परंतु स्वाद के साथ- साथ यह करी औषधि का भी काम करता है, इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को होगी। आज दुनिया भर में जिस बीमारी ने सबको भयभीत कर रखा है वह है स्वाइन फ्लू और डॉक्टरों ने इस जानलेवा बीमारी में भारतीय करी खाने की सलाह दी है तो जाहिर है कि करी में कुछ तो खास होगा ही। तो आइए जानते हैं कि करी और भारतीय भोजन में उपयोग किए जाने वाले मसाले कैसे हमारे शरीर में औषधि के रुप में काम करते हैं।
भारत और चीन में लंबे समय से अदरक का उपयोग दवाई के तौर पर किया जाता है। खांसी, कफ, सरदर्द और मसूड़ों के दर्द के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। भारत के घर- घर में इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी रसोईघर का मुख्य हिस्सा है जिसे दाल या सब्जी में डालकर उबाला जाता है। हल्दी की ख़ासियत है कि ऊंचे तापमान पर गर्म करने पर भी इसके औषधीय गुण नष्ट नहीं होते। सैकड़ों सालों से हल्दी को सौन्दर्य प्रसाधन के अलावा सर्दी खांसी के लिए भी उपयोग किया जाता है। हल्दी में अनिवार्य तेल, वसीय तेल, कम मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्व और हल्दी को रंग देने वाला पदार्थ करक्युमिन होता है। करक्युमिन में कई औषधीय गुण होते हैं। भारतीय सब्जियों और दालों में डाली गई हल्दी, जीरा, प्याज और अदरक के औषधीय गुण आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
मसालों के इन सभी गुणों को देखते हुए ही रूस के डॉक्टरों ने भी सलाह दी है कि स्वाइन फ्लू और खांसी जुकाम से बचने के लिए भारतीय मसालेदार करी उपयोगी साबित हो सकता है अत: स्वाइन फ्लू से बचना हो तो करी खाइए और फ्लू को दूर भगाइए। डॉक्टरों का कहना है कि मसालेदार सब्जी व दाल के औषधीय गुण स्वाइन फ्लू से बचने के लिए बाजार में मिलने वाली किसी भी दवा से कम नहीं है। मॉस्को में महामारी से बचाव के लिए गठित कमेटी के एक अधिकारी के अनुसार जीरा, हल्दी और अदरक जैसे मसालों से बने दालों और करियों में औषधीय गुण बीमारियों से रक्षा करते हैं। मसालेदार खाने के अलावा लोगों को ज़्यादा मात्रा में कच्चा प्याज और लहसुन का सेवन करने के लिए भी कहा जाता है। माना जाता है कि प्याज और लहसुन में भी रोगों से बचने के एंटी वॉयरल गुण होते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर मौसमी नजला जुकाम और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए हर देसी उपाय पर जोर दे रहे हैं। जिनमें अब भारतीय मसालों का नाम भी जुड़ गया है। भारत वासियों को खुश होना चाहिए कि वे तो इनका इस्तेमाल प्रतिदिन करते हैं अत: उन्हें स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी होने की संभावना भी बहुत कम होगी।
जरा सोचें - वक्त की पाबंदी
रोज वक्त पर आने की कोशिश करने के बावजूद देर से आना। यह एक ऐसी बुरी आदत है जो आपकी नौकरी भी छीन सकती है। आप इसलिए देर से आते हैं कि रात को पसंदीदा फिल्म या सीरियल के चक्कर में लेट सोए और सुबह उठ नहीं सके। लेकिन जनाब इससे आपके दफ्तर वालों को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें तो आपकी 8 घंटे की ड्यूटी चाहिए। इसलिए वक्त की पाबंदी को अपने टाइम-टेबल में जरूर डाल लें।

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home