February 17, 2010

आपके पत्र

हिंदी भाषा
सटीक तर्कों और तथ्यों वाला शानदार आलेख। लेखक को साधुवाद कि उन्होंने छत्तीसगढ़ी को पर्याप्त महत्व देते हुए हिंदी की अनिवार्यता को साबित किया। व्यावहारिक और भावनात्मक, दोनों पहलुओं से। यह ध्यान देने वाली बात है कि हिंदी और छत्तीसगढ़ी में कोई विरोध ही नहीं है। हर छत्तीसगढिय़ा हिंदी से भी बराबर प्रेम करता है और उतना ही मान (या कहें कि कहीं ज़्यादा) देता है। हिंदी भाषा से बढ़कर राष्ट्रभाषा है और छत्तीसगढ़ी हमारी अपनी बोली है। एक को पाने के लिए दूसरे को छोडऩे की कोई आवश्यकता नहीं है, और इसलिए यह कोई मुद्दा ही नहीं है।
-विवेक गुप्ता, भोपाल, vivekbalkrishna@gmail.com
महंगाई भ्रष्टाचार का पौधा है
उदंती के पिछले दोनों अंक खास हैं। नवंबर अंक में लेव निकोलायेविच के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा। ऐसे ही महान लेखकों की दिनचर्या उर्जा और प्रेरणा देती है। महत्त्वाकांक्षी फूल बहुत ही सुंदर कहानी है। खलील जिब्रान जैसे दार्शनिक लेखक को बार -बार पढऩा अच्छा लगता है, जीवन यदु की ...पर मुझको खटना पड़ता है, कविता को मर-मर जीने में... बहुत अच्छी पंक्तियां। अनकही में भ्रष्टाचार और गरीबी का घातक गठबंधन बहुत ही विचारोत्तेजक लेख है - भ्रष्टाचार आज हर जगह व्याप्त है। छोटे से छोटा कर्मचारी हर बात के लिये पैसे की मांग करता है और हम भी अपना समय बरबाद न हो इसके लिए उसकी मांग पूरी करते हैं। आज भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। महंगाई भ्रष्टाचार का ही पौधा है। ... दिसंबर अंक में अनकही पढ़ कर यही कहूंगी कि जलसमस्या आज विकराल रुप धारण करने के कगार पर है । यदि हम अब भी नहीं चेते तो बड़ी देर हो जायेगी । केवल सरकार को ही नहीं हमें भी इस ओर कड़े कदम उठाने होंगे। कोंकण की खूबसूरत यात्रा वृत्तांत या फिर यूं कहें कि यात्रा करवाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
सुमीता केशवा, मुम्बई, sumitakeshwa@yahoo.com
सुंदर अंक
उदंती का दिसम्बर अंक पढ़ा। मन्टो की कहानी, दीपाली की लघुकथाएं, समोसा माट साब और मुक्तादास के बारे में एक सांस में ही पढ़ गया। सुंदर अंक के लिए बधाई स्वीकारें।
- राजेश उत्साही, बैंगलोर, utsahi@gmail.com
सड़क चिंतन
सुरेश कांत जी हमारे समय के महत्वपूर्ण व्यंग्यकार हैं। उनकी शैली, जैसा कि आपने 21 वीं सदी के व्यंग्यकार में प्रकाशित सड़क चिंतन पर टिप्पणी करते हुए उनके व्यक्तित्व का आंकलन उन्हें बहुत सहज-सरल कहा है। यही विशेषता उन्हें अन्यों से अलग करती है ।
-जवाहर चौधरी, 16 कौशल्यापुरी, चितावद रोड, इन्दौर, jc.indore@gmail.com
कोकण यात्रा
प्रकृति मन को ताजगी और ऊर्जा से भर देते हैं। उदंती में आप समय समय पर हमें विभिन्न पर्यटन एवं पुरातत्व स्थलों के बारे में जानकारी देती हैं, जो पढऩे वालों को भी प्रकृति के करीब जाने और उन स्थलों की सैर के लिए उकसाते हैं। अभिषेक ओझा की पहाडिय़ों पर बसा कोंकण संस्मरण पढ़ते हुए यात्रा का अहसास तो हुआ ही साथ में दिये चित्रों से उन सुरम्य वादियों में घुमने की इच्छा और बलवती हो गई।
- लतिका शर्मा, दुर्ग

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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