December 13, 2008

मनोभावों का संप्रेषण करते मृत्युंजय के चित्र

मनोभावों का संप्रेषण करते मृत्युंजय के चित्र
देश भर की पत्र पत्रिकाओं और अखबारों में मृत्युंजय मिश्रा का नाम लेख और कहानियों के साथ रेखाचित्र के रू प में बार-बार दिखाई पड़ता है। यह ऐसे ही दिखाई पड़ता है जैसे धरती पर चलते-फिरते लोगों के साथ पेड़, पक्षी, सूरज, बादल, पानी और घर द्वार। दैनिक जीवन के इस्तेमाल की वस्तुएं और औरत।

चित्रों में लोग चलते-फिरते हलचल करते नजर आते हैं। ये लोग कागज की धरती पर अनगढ़ तरीके से उतरते हैं जैसे मिट्टी में खेलते हुए कोई मिट्टी कुरेद कर आकार बनाता है। इसमें आसपास के दृश्य होते हैं।

मृत्युंजय के चित्रों में मनोभावों का संप्रेषण प्रमुख होता है। रूपभेद, प्रमाण, भाव, लावण्य योजना, लय आदि। मृत्युंजय के चित्र सहज दृश्य को उपस्थित करते हैं। रूपकारों की बनावट के विस्तार में जाने की जरूरत महसूस नहीं करते बल्कि अर्थवत्ता की सूचना देने की लिए प्रतीकों का प्रयोग करते हैं।

विस्तृत पृथ्वी में जीवन संदर्भ जिस तेजी से बदलते हैं उसी तेजी से मृत्युंजय चित्र रेखा बनाते हैं। मृत्युंजय उत्तेजना से भरे ऊर्जावान कलाकार हैं यह उनके रेखाचित्रों की संख्या देखकर अनुभव होता है। ऐसा लगता है चलती रेलगाड़ी से, खिडक़ी से तेजी से बदलते दृश्यों को देखा जा रहा है। ये काम रूक- पलट कर देखने की भी मांग करते हंै। ये रुकना देखना सृजनात्मकता को नए सिरे से रचने के आयाम खोल सकता है।
उनकी अंतरिक्ष चित्र शृंखला अन्य चित्रों से बिल्कुल अलग है। इन चित्रों में बेचैनी के बावजूद स्थिरता, रंगों में गहराई एवं गंभीरता है। दूर आसमान में क्या-कुछ हलचल हो रही होगी, इन कल्पनाओं की फैन्टेसी, चित्रों में मुखर हैं। इन चित्रों में आकृतियों नहीं है, पहचान में आने लायक वस्तुरूप नहीं हैं, लेकिन यह रुपांकन किसी खोज, तलाश और उस निर्जन स्थान के सम्मोहन का इशारा करता है जो कहता है चलकर देखें।
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जन्म - 12.01.1974
शिक्षा - बी.कॉम, एम.ए. (हिन्दी साहित्य), एम.ए.( अंग्रेजी साहित्य), एमजेएमसी, पीएचडी अध्ययनरत, जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट, मुम्बई से इंटरमिडिएट एवं इलेक्ट्रानिक्स में डिप्लोमा।
कार्य - छत्तीसगढ़ संवाद में 7 साल से कॉपीराइटर के पद पर कार्यरत।
Website-www.Mrityunjayarts.com, Video C.D.-Big Frame Small paintings
पता- रामसागर पारा, धमतरी (छ.ग.) 493773
फोन- 07722-235353, मो. 9827474263, 9826119253, 9329737848
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उदंती.com के प्रथम अंक से ही किसी एक चित्रकार या कलाकार को प्रस्तुत करने की शृंखला में इस बार हमने मृत्यंजय के चित्रों को विभिन्न पन्नों पर प्रकाशित किया है।
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