September 15, 2019

गुरु पर करें गर्व

गुरु पर करें गर्व
- विजय जोशी
(पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल, भोपाल)
       भारतीय दर्शन में गुरु एक बहुत पवित्र शब्द है तथा इसे ईश्वर से भी ऊपर का दर्जा प्राप्त है। गुरु का पदप्रतिष्ठापैसा या ऊपरी तामझाम या आडंबर से कोई सरोकार नहीं। यह तो ज्ञानअनुभवआचरण एवं सदाशयता से जुड़ा पावन माध्यम है मंज़िल तक पहुँचने का। इसे केवल वही जानता या अनुभव कर पाता है जिसके जेहन में जिज्ञासा का भाव हो। इस संदर्भ में हाल ही में मेरे विद्वान् मित्र  ने एक पौराणिक प्रसंग साझा किया हैजो इस प्रकार है।
       नारद की भगवान्  विष्णु के बड़े भक्तों में गणना की जाती है। यदा कदा उन्हें भी अपनी भक्ति पर गर्व हो जाया करता था। यह बात विष्णु ली-भाँति जानते थे। एक बार उनके जाते ही भगवान्  विष्णु ने लक्ष्मी से नारद के बैठे स्थान को गोबर से लीपने को कहा। प्रस्थान कर रहे नारद ने यह बात सुन ली और अपना अप्रत्यक्ष अपमान समझते हुए जब कारण जानना चाहा, तो उत्तर मिला कि आप तो निगुरे यानी गुरु रहित हो। इसलिए ऐसा कहा।
       नारद ने सहमत होते हुए कहासत्य वचन प्रभु। पर मैं गुरु बनाऊँ तो बनाऊँ किसे।
       विष्णु ने कहाधरती पर जाओ और जिस व्यक्ति से सर्वप्रथम भेंट हो, उसे ही अपना गुरु मान लो।
       यह बात सुनकर नारद जब धरती पर पधारे, तो उनका सबसे पहले सामना हुआ एक मछुआरे से। नारद निराश होकर फिर विष्णुजी  के पास पहुँचे और कहाभगवन् ! वह तो कुछ भी नहीं जानता। उसे कैसे अपना गुरु मानूँ।
       विष्णु ने कहा-पहले अपना प्रण पूरा करो।
       नारद लौट आ और किसी तरह से बड़ी मुश्किल से उसे राजी करने के बाद फिर भगवान् विष्णु के पास पहुँचे तथा कहाहे भगवान् ! उसे तो कुछ भी नहीं आता। अब क्या करूँ। यह सुनते ही विष्णु को क्रोध आ गयानारद तुम्हारा अहंकार अभी गया नहीं। गुरु की निंदा करते हो। जाओ शाप है -अब तुम्हें 84 लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।
       नारद घबरा गए– भगवन स्वीकार पर साथ ही मुक्ति का उपाय तो बतलाइए।
       विष्णु ने कह -उपाय तो अपने गुरु से ही पूछो।
       नारद लौट ग और सारी बात अपने गुरु से साझा करते हुए उपाय पूछा, तो गुरु रूपी मछुआरे ने कहायह तो बड़ा सरल है। आप 84 लाख योनियों की तस्वीर बनाकर उन पर लेट कर गोल घूम लेना और जाकर अपने भगवान् को बता देना।
       नारद ने ठीक ऐसा ही किया और फिर विष्णुजी के पास उपस्थित होकर सारी बात बताते हुए अपनी मुक्ति निवेदन दुहराया। यह सुनकर विष्णुजी ने कहादेखा तुमने, जिस गुरु की निंदा की उसी ने तुम्हें शाप से बचाया। अब समझे गुरु महिमा अपरंपार है।
       बात भले ही पौराणिक कल्पना की कड़ी हो; पर सारगर्भित है। गुरु का आकलन गुणों से करते हुए उनका पूरा सम्मान करना चाहिए। इसमें शिष्य का कल्याण है। गुरु के वचन पर विश्वास रखने वाले का सदा भला होता है।
गुरु गूँगे गुरु बावरे गुरु के रहिए दास,
गुरु जो भेजे नरकहींस्वर्ग की रखि आस।
सम्पर्क: 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास), भोपाल- 462023, मो. 09826042641, E-mail- v.joshi415@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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