June 05, 2019

पुस्तक समीक्षा

हरियाली और पानी
-कृष्णा वर्मा (रिचमंडहिलओंटेरियो कैनेडा)
समीक्ष्य पुस्तक: हरियाली और पानी (बालकथा),लेखक : रामेश्वर काम्बोज हिमांशु’, चित्रकार:अरूप गुप्ता
पहला संस्करण: 2017,पहली आवृत्ति:2018,पृष्ठ:20 (आवरण सहित)मूल्य:35 रुपयेप्रकाशक:राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारतनेहरू भवन, 5 इन्स्टीट्यूशनल एरिया, फेज़-2, वसन्त कुंज, नई दिल्ली-110070
   
रामेश्वर काम्बोज हिमांशुएक वरिष्ठ साहित्यकार हैं, जिन्होंने व्यंग्य, लघुकथा, कविता, समीक्षा आदि विभिन्न  विधाओं में लेखन के साथ-साथ, बच्चों के लिए भी भरपूर मात्रा में लेखन किया है। हाल ही में बच्चों के लिए लिखी उनकी पुस्तक हरियाली और पानीपढ़ने का सुअवसर मिला। इस पुस्तक की 16,000 से भी अधिक प्रतियों का प्रकाशन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा हुआ है।

वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण से संसार भर को विषमताओं का सामना करना पड़ रहा है। जल को जीवन का पर्याय माना जाता है। और आधुनिक समय में जल एक चिंता का विषय बना हुआ है। जल है तो जीवन है। कहानी का महत्त्व उसके छोटे या बड़े आकार से नहीं होता, महत्त्वपूर्ण होता है उसका पाठक के हृदय तक अपना संदेश पहुँचाना। इस छोटी-सी बाल कथा में कथाकार ने आम, नीम, पीपल, बरगद और पानी की बात की है। सब एक-दूसरे की ओट में सुखी जीवन बिता रहे थे। एक दिन हरियाली ने झल्ला कर पानी को जाने को कहा, तो वह नाराज़ हो कर चला गया। अब जल के बिना प्यास के मारे सभी वृक्षों के प्राण सूखने लगे। हरियाली मरने लगी और सारे पत्ते धीरे-धीरे पीले हो कर गिर गए। उधर पानी भी बड़ा उदास था। सूर्य के ताप से उसका बदन जलता तो कभी धूल मिट्टी आँखों में पड़ती। आख़िरकार सूखे पत्तों ने पानी को ढूँढ लिया। सूखे पत्तों की हालत देखकर पानी को बहुत दु:ख हुआ और उसने पुन: पेड़ों को नवजीवन देने का निश्चय किया। पानी को पाकर फिर से हरियाली मुसका उठी और पानी को भी सुख से रहने का स्थान मिल गया।

कहानियों का जीवन में अपना एक विशेष स्थान होता है। यूँ तो प्रत्येक वर्ग इनसे प्रभावित होता है लेकिन बालमन पर कहानियाँ अनूठा असर छोड़ती हैं। बचपन में सुनी कहानियों की स्मृतियाँ सदैव हृदय पटल पर अंकित रहती हैं। कहानियाँ बच्चों में सद्गगुण, अच्छे विचार और संस्कार रोपने का एक सशक्त माध्यम हैं। बच्चों के व्यक्तित्व के विकास और सृजनात्मक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लेखक ने बड़े रोचक ढ़ंग से हरियाली और पानी के संबंध तथा एक दूसरे की उपयोगिता के ज्ञान के साथ-साथ कई वृक्षों के नामों से भी बच्चों को परिचित करवाया। और बड़ी कलात्मकतापूर्ण बालमन पर अमूल्य पानी के महत्त्व की गहरी छाप छोड़ी। वृक्षों तथा पानी के संवादों का मानवीकरण और  प्रसिद्ध चित्रकार श्री अरूप गुप्ता के  रंग-बिरंगे ख़ूबसूरत आकर्षक चित्रों ने कहानी को और भी अधिक सजीव कर दिया। चित्रों के द्वारा कहानी को समझना बच्चों के लिए सरल ही नहीं, बल्कि बहुत रोचक हो जाता है।

आकर्षक आवरण और सुन्दर चित्र से सजी, बिना उपदेश दिए, सुंदर संदेश देती हुई बहुत शिक्षाप्रद कहानी। बाल मन को पर्यावरण के प्रति सजग करती तथा प्रेम, मैत्री और एक-दूजे के प्रति आदर का पाठ पढ़ाती हुई यह कहानी बताती है कि एक-दूजे के हित में ही अपना हित निहित होता है।

0 Comments:

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष