June 05, 2019

पर्यावरण

अभियानः 
अनुपयोगी जमीन पर उगाए जाएँगे पेड़
जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए केंद्र सरकार पेड़ उगाने की एक नई योजना लाने जा रही है। प्रस्तावित 'जलवायु निवेश योजनाके तहत बेकार पड़ी जमीन पर बेशकीमती लकड़ी देने वाले पेड़ों को उगाने की अनुमति दी जाएगी।
इस लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर में हो सकेगा। योजना का लक्ष्य बड़े पैमाने पर पेड़ उगाकर 2030 तक 2.5 अरब टन कार्बन डाईआक्साइड को सोखना है। योजना सार्वजनिक उपक्रमों और किसानों की आय में भी इजाफा भी करेगी।
'ट्री कवरएरिया बढाने का लक्ष्य
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव सी. के. मिश्रा ने बताया कि कार्बन सोखने के लिए वनों का विस्तार किया जाना है। वन क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए प्रयास हो रहे हैं। लेकिन उसमें संभावनाएँ  सीमित हैं। इसलिए 'ट्री कवरबढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है।
पेड़ उगाना जंगल बसाने की तुलना में कहीं आसान है और इससे लोगों की आय भी बढ़ाई जा सकती है क्योंकि देश में बड़े पैमाने पर ऐसी कृषि भूमि है जिसमें खेती नहीं होती है। इस भूमि का इस्तेमाल हम फर्नीचर में इस्तेमाल होने वाले ऐसे पेड़ उगाने के लिए कर सकेंगे जिसकी देश में बड़ी मांग है।
एक अनुमान के अनुसार देश में फर्नीचर के लिए प्रतिवर्ष 45 हजार करोड़ रुपये की लकड़ी आयात होती है। इसकी वजह यह है कि वनों को काटने की मनाही है। इसके अलावा फर्नीचर के लिए उपयुक्त प्रजातियों की उपलब्धता देश में कम है।
10 लाख एकड़ सरकारी जमीन का उपयोग नहीं
सरकारी महकमे और सार्वजनिक उपक्रमों की 10 लाख एकड़ से भी ज्यादा जमीन बेकार पड़ी है। देश में कुल भूभाग का 60 फीसदी हिस्सा कृषि भूमि है। लेकिन इसमें से 88 फीसदी हिस्से का ही खेती के लिए इस्तेमाल होता है। बाकी बेकार पड़ी रहती है। करीब 22 फीसदी भाग में वन हैं जिन्हें 33 फीसदी करने का लक्ष्य वन नीति में है लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद इस दिशा में ज्यादा सफलता हाथ नहीं लगी है।
किसानों को अतिरिक्त आय

पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी लोग खेती-बाड़ी छोड़ रहे हैं क्योंकि परंपरागत फसलों को उगाने में लागत नहीं निकल पाती है। जबकि पेड़ों से किसानों को अच्छी आय हो सकती है। जलवायु निवेश योजना के तहत सार्वजनिक उपकरणों, सरकारी महकमों, किसानों को अनुपयुक्त पड़ी जमीन पर कीमती लकड़ी देने वाले पेड़ों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके तहत जो पेड़ उगेंगे उन्हें काटने की अनुमति होगी। ताकि उन्हें बेचने के बाद किसान फिर से उनकी खेती कर सकें। इससे जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में भी मदद मिलेगी। पेड़ कार्बन सोखते हैं। पेड़ उगेंगे और कटते रहेंगे। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहगी

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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