June 07, 2017

जीवन दर्शन:

 खुद का मूल्यांकन 

- विजय जोशी
पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल भोपाल

जीवन में केवल विपत्ति ही नहीं अपितु अच्छे समय में भी खुद का मूल्यांकन बेहद जरूरी है। आप कैसा काम करते हैं उसके बारे में दूसरे आपसे बेहतर ढंग से बता सकते हैं। सच पूछा जाये तो आप एक स्वस्थ एवं स्वच्छ फीडबेक प्राप्त कर तथा उस पर अमल करके स्वयं में आश्चर्यजनक सुधार कर सकते हैं। पर उसके लिये आपको अपना सोच बड़ा और किसी हद तक कमी हो सहर्ष स्वीकार कर सकने का माद्दा अपने व्यक्तित्व में अंगीकार करना होगा।
एक छोटा बच्चा एक स्टोर के कैश काउंटर पर पहुँचा तथा एक नंबर मिलाया। दुकानदार ने उसका संवाद सावधानीपूर्वक सुना।
बालक- मैडम क्या आप मुझे लॉन की सफाई का कार्य दे सकती हैं।
महिला (दूसरी ओर से)- मेरे पास पहले से ही यह सुविधा है।
बालक बोला - मैं आपका लॉन उस आदमी से आधे वेतन में साफ कर दूँगा और वह भी अधिक  अच्छी तरह से।
महिला बोली- मेरे यहाँ अभी जो काम कर रहा है, मैं उससे पूरी तरह संतुष्ट हूँ।
बालक ने और अधिक विनम्रतापूर्वक कहा- मैडम मैं आपके घर की साफ सफाई भी उसी आधे  दाम में कर दूँगा।
महिला बोली- नहीं धन्यवाद।
चेहरे पर प्रसन्नता के भाव के साथ बालक ने फोन नीचे रख दिया। दुकानदार जो यह सब सुन रहा था बालक से बोला- मैं तुम्हारी जरुरत के मद्देनकारतुन्हें काम दे सकता हूँ।
बालक ने कहा- नहीं धन्यवाद।
लेकिन तुम तो काम के लिये गिड़गिड़ा रहे थे- दुकानदार ने कहा।
बालक बोला- मैं तो जहाँ पर इस समय कार्य कर रहा हूँ उनका मेरे कार्य के प्रति क्या सोच है उसके बारे में फीडबेक ले रहा था। उस भद्र महिला के यहाँ कार्य करने वाला व्यक्ति मैं ही हूँ। जिससे वह पूरी तरह संतुष्ट है।
इसी को कहते हैं स्वमूल्यांकन। स्वयं पर आत्ममुग्ध होने के बजाय हम यह सोचें कि दूसरे हमारे बारे में  क्या सोचते हैं। जीवन में सुधार का यह सबसे शर्तिया सूत्र है। उत्कृष्टता निरंतर चलनेवाली प्रक्रिया है। इसका सुख वही जानता है जो उसका अनुपालन सच्चे अर्थों में करता है। सपने और उसे सच्चा करने या लक्ष्य प्राप्ति के बीच बस यही फर्क है। सपना जहाँ चाहता है शोर रहित निद्रा वहीं लक्ष्य की चाहत है निद्रारहित प्रयत्न उपलब्धि के लिए।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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