June 11, 2013

शोध



लंबा जीवन चाहिए तो भलाई कीजिए
अगर आपको लंबा जीवन चाहिए तो दूसरों की भलाई कीजिए। यह बात हम नहीं बल्कि एक अध्ययन में कही गई है। एक अमेरिकी अध्ययन में यह बात सामने आई है। इस अध्ययन में 10,317 कॉलेज छात्रों को शामिल किया गया था। इन छात्रों के 1957 में स्नातक करने के बाद से ही उन पर अध्ययन किया जा रहा था। समाचार पत्र 'डेली एक्सप्रेस के मुताबिक इन छात्रों से साल 2004 में कहा गया कि वे बीते 10 सालों में नियमित रूप से उनके द्वारा किए गए स्वैच्छिक कार्यों के संबंध में बताए। चार साल बाद ऐसे 4.3 प्रतिशत लोगों की मौत हो गई जिन्होंने स्वैच्छिक कार्य नहीं किए थे ;जबकि स्वैच्छिक कार्य करने वाले चार प्रतिशत लोगों की ही मौत हुई । जिन लोगों के कार्य दूसरों की खुशी को ध्यान में रखकर किए गए थे उनमें से केवल 1.6 प्रतिशत लोगों की मौत हुई। अध्ययनकर्ता आंद्रेई फुरल फोर्बिस के मुताबिक यह कहना उचित है कि इससे लोगों का फायदा होता है इसलिए उन्हें दूसरों के लिए स्वैच्छिक रूप से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैसे शोध में देखा गया है कि जो लोग खुद के फायदे के लिए स्वैच्छिक कार्य करते हैं उन्हें इससे ज्यादा लाभ नहीं होता है ।                     

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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