April 13, 2013

कलाकार

बल्ले पर बस्तर की लोक चित्र-कला
खेम वैष्णव
आईपीएल मैच की टीम "दिल्ली डेयर डेविल्स" के लिए दिल्ली स्थित संस्था "आर्ट्स फॉर ऑल" ने देश के चुनिन्दा चित्रकारों से सम्पर्क किया और उन्हें अपनी कलाकृति से बल्लों को सजाने का अवसर प्रदान किया। इसी सन्दर्भ में कोंडागाँव निवासी और सुप्रसिद्ध लोक चित्रकार खेम वैष्णव से भी सम्पर्क किया गया। उनसे कह दिया गया कि वे बल्ले पर चित्रकारी के लिए स्वतन्त्र हैं। कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया जाएगा। इससे खेम वैष्णव के कलाकार को बल मिला और उन्होंने 5.3 फीट तथा 1.5 फीट के दो बल्लों पर बस्तर की संस्कृति को लोकचित्र के माध्यम से उसकी समग्रता में उकेर दिया। उन्होंने इन बल्लों पर बस्तर की आदिवासी एवं लोक-संस्कृति को इस तरह रूपायित किया है कि वे बल्ले एक यादगार बन कर रह जाने वाले हैं। धार्मिक अनुष्ठान "जतरा" आदिवासी एवं लोक समुदाय के मन में प्रकृति एवं देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति का प्रतीक है। सूर्य-चन्द्र का अंकन उनकी शाश्वतता के प्रतीक हैं। इसी तरह "मोहरी" केवल एक वाद्य नहीं अपितु लोक जागरण का प्रतीक है। नृत्य और संगीत आदिवासी एवं लोक जीवन के आह्लादकारी क्षणों को प्रदर्शित करते हैं। वन्य-जीव, जन-जीवन, जीवन-चक्र और आदिवासी एवं लोक जीवन में महुआ वृक्ष की उपादेयता आदि का चित्रण इन बल्लों पर बखूबी किया गया है। चटख रंगों का प्रयोग इन बल्लों की एक अन्य
विशेषता है। उल्लेखनीय है कि श्री वैष्णव ने यह चित्रकला अपनी माता से सीखी और समय के साथ उसे परवान चढ़ाते ग। उनके लोकचित्रों की प्रदर्शनियाँ अब तक देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों में हो चुकी हैं।



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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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