October 29, 2011

आपके पत्र/ मेल बॉक्स

सार्थक श्रम
नि:संदेह आपका श्रम अति- सार्थक है, यह उदंती के अंकों को देखकर लगता है। मुखपृष्ठ की नयनाभिराम छवि और विविधता लिए रचना सामग्री आपके चयन और सम्पादन की गवाही देती हैं । कभी- कभी गजले भी छापा कीजिए। बधाई
- मनोज अबोध, बिजनौर (उ।प्र.)
Email: manojabodh@gmail.com

सम्पूर्ण पत्रिका
उदंती में साहित्य की विभिन्न विधाओं यथा कहानी, कविता, व्यंग्य तथा लघुकथाओं के साथ जिस प्राथमिकता के साथ अन्य विषयों को भी स्थान दिया जाता है वह काबिले तारीफ है। खासकर पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति, कला आदि । साथ ही जीवन के ज्वलंत मुद्दों पर अनकही में जो सवाल उठाए जाते हैं वह पत्रिका को एक संम्पूर्ण पत्रिका बनाती है। नि:संदेह आपका प्रयास प्रशंसनीय है। कोटिश: बधाई।
- अत्माराम मोहंती, रांची
खूबसूरत प्रस्तुति
उदंती अगस्त 2011 का अंक प्राप्त हुआ। मेरी रचना को जितनी खूबसूरत तरीके से पत्रिका में स्थान दिया उसके लिए धन्यवाद। मुझ जैसे नवोदित लेखक, जो अपने उम्र के आखिरी मुकाम में जीवन की पुस्तक में पढ़े गये पृष्ठों को अपनी कलम से कागज पर उतारता है उनको आपने अपनी महत्वपूर्ण पत्रिका में स्थान दिया इससे यह स्पष्ट है कि साहित्य में रचनात्मक प्रयास करने वालों को आप उदारता से प्रोत्साहित करती है।
- राम अवतार साचान, इलाहाबाद
सम्मान मांगा नहीं जाता
पद्मश्री सम्मान और मूंगफल्ली
सम्मान मांगा नहीं जाता, दिया जाता है। इसके लिए अप्लाई करने से बड़ा अपमान भला और क्या हो सकता है? कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति ना तो अप्लाई करेगा और ना कोई जुगाड़़ ही लगाएगा।
-हरिहर वैष्णव, कोंडागांव, बस्तर
Email : lakhijag@sancharnet.in

*************************
फिर कैसी रौशनी
व्यस्तताओं की डोरी में बंधे हम कहां से कहां निकल गए। वह पहले सा दशहरा, दीवाली सब कहां गई। आज लक्ष्मी के आगमन की खुशी का यह पर्व महज औपचारिकता या मजबूरी सा क्यों लगने लगा। क्यों दीवाली के नजदीक आते ही हमारी त्यौरियां चढ़ जाती है? हर्ष और उल्लास बनाए रखने की होड़ में गृहलक्ष्मी और गृहस्वामी के पसीने निकलने लगते हैं और महंगाई की फटकार जेब का दिवाला निकालने लगती है।
भगवान श्री राम को अयोध्या के राज्य सिंहासन पर विराजित होने की खुशी में यह पर्व मनाया गया।
आज हम रामराज्य की सिर्फ बातें करते हैं पर सार्थक कदम नहीं उठाते। शहर की गंदगी के लिए नगर निगम को कोसने वाले हम अपने घर के कचरे नालियों और सड़कों पर डालते हैं। सच में अगर जनता जनार्दन आत्मचिंतन करें और आत्म सुधार करें तो शहर रोशन हो जाएगा। और तभी सच्ची दीवाली मनाई जाएगी।
यह मेरा आप समस्त नागरिकों को दीवाली की शुभकामना के साथ आग्रह है कि अपने आंगन के साथ अपने मन को भी रोशन करें और ईमानदारी, निष्ठा मर्यादा से अपने नागरिक दायित्वों का निर्वहन करें। मीठे वचन की मिठाइयां लोगों में बांटे और सारे गिले शिकवे भूलाकर निष्ठापूर्वक मां लक्ष्मीजी की पूजा अर्चना करें। तभी दीवाली सार्थक होगी।
कृत्रिम दीप लडिय़ों की बनावटी रोशनी मन का अंधेरा ना मिटा पाई। तो फिर कैसी दीवाली?
- अनिल कुमार त्रिपाठी, दौंदेखुर्द, रायपुर (छ.ग.)

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष