April 10, 2011

आपके पत्र/ मेल बॉक्स


पर्यावरण पर अच्छा चिंतन
उदंती का होली और महिला दिवस पर केन्द्रित अंक पढ़ा, आलेखों का बहुत अच्छा संयोजन है। अनकही में जहाँ यथार्थ का परिचय कराया है वहीं पर्यावरण पर अच्छा चिंतन है। कुल मिलकर पठनीय सामाग्री और अच्छे कलेवर के लिए आपको साधुवाद ...
-प्रोफेसर अश्विनी केशरवानी
ashwinikesharwani@gmail.com
समाज को कचोटती रचना
हाऊस वाईफ के अस्तित्व पर उठते सवाल? बहुत ही प्रेरणादयी और आज के समाज को कचोटती...अच्छी रचना है। वंदना जी ने नारी शक्ति का बोध कराया है।
- सत्यम शिवम
satyamshivam95@gmail.com
चर्चा की मांग करता लेख
वन्दना जी आपका लेख वाकई एक ज्वलंत प्रश्न पर चर्चा की मांग कर रहा है, घर में रहकर बच्चों को संस्कार देना तथा समाज में परिवार को एक सम्मानजनक स्थान दिलाना एक गृहणी का ही काम है और अन्तत: देश के प्रति योगदान !
- अनिता निहालानी, असम
गंभीर प्रश्न
वंदना जी कविता के साथ- साथ आलेख में भी बहुत गंभीर प्रश्न उठाती हंै। हाऊस वाईफ के अस्तित्व पर उठते सवाल? आलेख में भी उन्होंने एक ऐसे ही गंभीर प्रश्न को उठाया है। भाषा पर उनकी पकड़ अच्छी है। इस लेख के माध्यम से वे नई दृष्टि दे रही हैं।
- अरुण चन्द्र रॉय,
arunroy1974@gmail.com
बहुत खूब वंदना जी
मैं एक कामकाजी लड़की हूं और हाऊस वाईफ्स का आदर करती हूं। क्योंकि मैं हाऊस वाईफ के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकती।
- बाबुषा, जबलपुर
astu_1979@hotmail.com
उनकी महत्ता पैसे कमाने वाली से ज्यादा है
मैं नौकरी करती हूँ। मुझे फिर भी कभी ये नहीं लगा कि मैं बहुत बड़ा कोई महान काम कर रही हूँ। घर की थोड़ी बहुत जिम्मेदारियां भी निभाने की कोशिश करती हूँ। पर मेरी मां हर काम को बड़ी आसानी से निपटा लेती है वह बात मुझमें नहीं आ पाती। जो लोग ऐसा समझते है कि गृहिणी मतलब सिर्फ घर का कामकाज करने वाली तो उनकी सोच पर मुझे हँसी आती है क्योंकि मुझे पता हैं कि अगर मेरी मां दो दिन घर के काम से छुट्टी ले ले या आराम कर ले तो मेरी क्या हालत होती है। उनकी महत्ता पैसे कमाकर लाने वाली महिला से कहीं ज्यादा है। घर के सारे आर्थिक निर्णय भी उन्हीं के होते हैं और सही भी। ऐसे में उनकी महत्ता को नहीं समझना ही सबसे बड़ी बेवकूफी है।
- पिंकी
सार्थक और सटीक बात
पत्रिका का मार्च अंक प्राप्त हुआ। पत्रिका का कलेवर अत्यंत आकर्षक, रंगीन एवं साज-सज्जा पूर्ण है। सम्पादकीय यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ....? एवं क्रोधित प्रकृति दोनों ही कटु यथार्थ की ओर इंगित करते हैं परन्तु मानव समझे तब न! सार्थक और सटीक बात कहने के लिए साधुवाद। बेटियां लाएंगी उजियारा लेख जानकारी देने के साथ- साथ प्रेरणास्पद भी है। हाउस वाइफ के अस्तित्व पर उठते सवाल? में अनेक सवाल उठाए गए है जो आज के तथाकथित समाज पर कई प्रश्न चिह्न लगाते हैं। सांस्कृतिक पर्व होली पर लेख एवं होली पर हाइकू पर्व के अनुकूल है अन्य सभी सामग्री स्तरीय, पठनीय व संग्रहनीय है।
- डा. रमा द्विवेदी
ramadwivedi53@gmail.com
एक कलाकृति
उदंती अपने मनोरम रूप एवं सारगर्भित सामग्री के 'मणिकांचन' योग से यह एक 'कलाकृति' बन गई है (मात्र पत्रिका नहीं)। संपादकीय ने मन मोह लिया। बेटियां लाएंगी ..., हाउस वाइफ, बेटी की कमाई... तीनों आलेख अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रासंगिक और विचारोत्तेजक हैं। अन्य सभी सामग्री भी बहुत ज्ञानवर्धक, मनोरंजक है। हाइकु की प्रस्तुति की प्रशंसा में क्या कहूं? मन किया कि इस पृष्ठ को फ्रेम कराकर अपनी अध्ययन मेज पर सजा लूं।
- डॉ. सुधा गुप्ता
काकली, साकेत, मेरठ (उ.प्र.)

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

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