April 10, 2011

कुत्तों की सबसे मंहगी शादी

लंदन की एक महिला ने अपनी प्रिय पालतू कुतिया लोला का अकेलापन दूर करने के लिए उसका स्वयंवर रचाया। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन प्रतियोगिता रखी। उसमें उन्हें सौ आवेदन मिले इनमें से उन्होंने 6 कुत्तों को चयनित किया। स्वयंवर के लिए आए इन कुत्तों में से चीनी प्रजाति के मगली से उसकी शादी तय की गई। खास बात यह है कि मगली को 2005 में ब्रिटेन का सबसे बदसूरत कुत्ता चुना गया था।
लोला की शादी में 20 हजार पौंड (करीब 14 लाख रुपये) खर्च किए। यह ब्रिटेन में हुई कुत्तों की अब तक की सबसे महंगी शादी मानी जा रही है। लोला ने इस अवसर पर एक हजार पौंड (करीब 72 हजार रुपये) की डिजायनर पोशाक के साथ हीरे- मोतियों के आभूषण पहने थे। दूल्हे मगली की पोशाक ई-बे वेबसाइट से खरीदी गई थी। इस अनोखी शादी में 80 मेहमान शामिल हुए। समारोह स्थल को चार हजार पौंड (करीब तीन लाख रुपये) के फूल- गुलदस्तों और गुब्बारों से सजाया गया था। लोला मगली को पाकर बहुत खुश दिखाई दे रही थी।
लोला की मालकिन 32 वर्षीया लुईस हैरिस कुत्तों और उनसे संबंधित सामान का व्यवसाय करने के साथ उनके लिए पार्लर भी चलाती हैं। हैरिस पहले भी अपने छह साल के पालतू कुत्ते के जन्मदिन पर, उसके डिजाइनर कपड़ों, उसके जेवरों आदि पर लाखों खर्च करने के लिए प्रसिद्ध रही है। हैरिस ने बताया कि लोला के भाई- बहन लूलू और लैरी लोला के साथ नहीं खेलते थे इस कारण वह अकेलापन महसूस करती थी। अब उसे साथी मिल गया है।

दुनिया का सबसे विशालकाय बदबूदार फूल
फूल सुगंध और सौंदर्य का प्रतीक होता है लेकिन यदि फूल से खुशबू की जगह बदबू आए तो आश्चर्य तो होगा ना। जी हां पिछले दिनों उत्तरी स्विट्जरलैंड के शहर बासेल वनस्पति उद्यान में एमॉर्फॉफैलस टाइटैनम नामक एक ऐसा विशालकाय फूल खिला जिससे बदबू आती है और वह भी जले हुए शक्कर या सड़े हुए मांस की। इस फूल को मुर्दा फूल के नाम से भी जाना जाता है। इस फूल के बीचों बीच एक लंबा तना होता है जिसके चारों ओर सैकड़ों नर व मादा फूल लाल रंग के ब्रैकेट से घिरे होते हैं। इस गंध की वजह परागण के लिए कीड़े-मकोड़ों को आकर्षित करना होता है।
स्विट्जरलैंड में यह 75 सालों में पहली बार खिला और बासेल में इसे खिलने में 17 वर्षों का समय लगा। दुनिया में सिर्फ दो मीटर यानी 6।6 फुट ऊँचा यह फूल तीन दिन ही जीवित रहता है इसके बाद यह फूल मुरझाने लगता है। इस फूल के मुरझाने से पहले इसे करीब हजारों लोगों ने देखा। 1878 में इटली के वैज्ञानिक बेक्कारी द्वारा इसकी खोज किए जाने के बाद अब तक दुनिया-भर में 134 बार इस फूल को प्रयास पूर्वक उगाया जा सका है। वैसे ये फूल मूल रूप से इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के ऊष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में पाया जाता है और इसे आर्द्र मौसम की जरुरत होती है। ये जंगलों में भी यदाकदा ही खिलता है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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