March 21, 2011

शरीर को जरूरी ईंधन देता है पालक

पालक में पाए जाने वाले नाइट्रेट आपको बढ़ाते और मजबूत बनाते हैं। आम धारणा यह है कि लौह तत्व के कारण पालक लाभकारी होता है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें पाए जाने वाले नाइट्रेट इससे भी ज्यादा लाभकारी हैं।
पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नाइट्रेट जीवकोषों को मजबूत बनाते हैं। इन्हीं से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। पालक हमारे शरीर को उन जरूरी तत्वों से संचित करता है, जिनके माध्यम से हमारे शरीर का विकास होता है। यह हमारे शरीर की कोशिकाओं को जरूरी ईंधन देता है।
'मेटाबॉलिज्म' नामक जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी कुछ समय पहले तक यह समझा जाता था कि नाइट्रेट में शरीर को फायदा पहुंचाने सम्बंधी कोई गुण नहीं होता है। जबकि स्वीडन के वैज्ञानिकों का मत है कि अकार्बनिक नाइट्रेट का तीन दिनों तक थोड़ी मात्रा में भी सेवन करना बेहद फायदेमंद रहता है।
पथ्य नाइट्रेट शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा बढ़ाता है। इसका काम रक्त नलिकाओं को खोलना और रक्तचाप की संभावना को कम करना है। इससे हमारे शरीर में रक्तसंचार बेहतर होता है।
पालक खाएं याददाश्त बढ़ाएं
हर शख्स चाहता है कि उसका दिमाग आखिरी वक्त तक चुस्त- दुरुस्त और युवा बना रहे। याददाश्त हमेशा उम्दा रहे, पर हकीकत में सबके साथ ऐसा नहीं होता, क्योंकि उम्र बढऩे के साथ- साथ कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया क्रमश: क्षीण होने लगती हैं।
साऊथ फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में एक शोध हुआ। इससे पता चला है कि हरी पत्तेदार सब्जियाँ- खासकर मेथी, पालक, सरसों, चौलाई व शलजम को आहार में खास स्थान देने से व्यक्ति का दिमाग वृद्धावस्था में भी चुस्त- दुरुस्त व युवाओं की तरह सक्रिय बना रह सकता है।
शोधकर्ताओं की राय में हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन (खासकर विटामिन सी व ई) और खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इनमें कई 'एंटीऑक्सीडेंट' भी उपलब्ध रहते हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के क्षीण होने की प्रक्रिया को कम करते हैं। नतीजतन उम्र ढलने के बाद भी आपकी दिमागी सक्रियता व याददाश्त उम्दा बनी रहती है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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