January 29, 2011

दुर्लभ काला तेन्दुआ

साधारण रंग के नर तेन्दुए के साथ काले रंग के मादा तेन्दुए का यह अत्यंत दुर्लभ चित्र टेलीफोटो लेन्स युक्त कैमरे से दक्षिण भारत के एक जंगल में लिया गया है। काले रंग के तेन्दुओं की अलग से नस्ल नहीं होती। ये भी पीले रंग के ऊपर काले धब्बों वाली नस्ल में ही मेलनिज़्म नामक जैविक विसंगति के कारण कभी कभार जन्म लेते हैं। तेन्दुआ अकेले जीवन- व्यतीत करने वाला प्राणी हैं। सिर्फ सहवास के लिए ही नर और मादा एक दो दिन के लिए साथ- साथ रहते हैं। मादा शिशुओं को अकेले ही पालती है। इस परिप्रेक्ष्य में काले तेन्दुए को जंगल में देख पाना दुर्लभ है और काले तेन्दुए को प्राकृतिक अवस्था में जोड़े में देख पाना तो अत्यधिक दुर्लभ अवसर है। वन्य प्राणियों के तस्करों से इन्हें सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से जंगल का नाम गुप्त रखा गया है।
अलका ने रचा इतिहास
असम के राजीव गांधी ओरंग नेशनल पार्क में अलका नाम की एक हथिनी ने जुड़वा बच्चो को जन्म दिया है। इतिहास में किसी हथिनी द्वारा जुड़वा बच्चे पैदा करने की यह अद्भुत घटना है। हाथी के ये दोनों जुड़वा बच्चे मादा हैं। अलका ने इससे पहले भी चार बच्चों को जन्म दिया है। इनमें से पांच साल की इनकी बहन अपनी दो नन्हीं बहनों को देख कर उन्हें छोड़कर जाने को तैयार नहीं थी, लेकिन मां को डर था कि नन्हें शिशुओं को कुछ नुकसान न पहुंचा दे, अत: वह उसे दूर हटाना चाहती थी। इन दोनों शिशुओं को बाघों का भी डर है इसलिए पार्क अधिकारियों ने इनकी सुरक्षा हेतु दो व्यक्ति नियुक्त किया है।

1 Comment:

Rashmi Swaroop said...

wow.. very intereting ! :)

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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