January 29, 2011

आपके पत्र/ मेल बॉक्स


एक टोकरी भर मिट्टी
हिन्दी की यह कहानी अद्भुत है। 1900 में छपी पहली मौलिक कहानी होने के बावजूद यह आज की कहानियों के बीच भी पूरे प्रभाव और प्रसंगिकता के साथ उपस्थित है । इस कहानी को मैंने पहली बार लगभग पचास वर्ष पूर्व चंदामामा में पढ़ा था। बाद में पहली कहानी को ले कर हुई बहसों के चलते सारिका आदि में। आपने इसका उपयुक्त चयन किया।
- जवाहर चौधरी, इंदौर,
jc.indore@gmail.com
छत्तीसगढ़ के रमरमिहा
शक्ति क्षीण करने और फूट डालने के कथन की पुष्टि शायद स्थानीय स्तर पर, रामनामियों द्वारा नहीं की जाती। वैसे बढिय़ा लेख।
-राहुल कुमार सिंह, रायपुर
rahulsinghcg@gmail.com
आशा है राजसी शादी बनी रहेगी
'सबसे महंगी शाही शादी' के कुछ वर्षों बाद सब से बड़ी सनसनी फैलाती विवाह विच्छेद के किस्से आजकल आम बात हो गई है। आशा है यह राजसी शादी बनी रहेगी उदंती का दिसंबर अंक पठनीय है, बधाई स्वीकारें॥
- सी एम प्रसाद
cmpershad@gmail.कॉम
हैं बहुत से देश, जिनमें रात होती ही नहीं
चाहकर भी सूर्य उन देशों में ढल पाए नहीं
बहुत ही सुंदर व शिक्षाप्रधान गजल पढ़वाने के लिए उदंती को धन्यवाद। जहीर कुरेशी जी की कलात्मक रचनाएं संबंधों के शिल्प से बुनी हुई हैं।
-देवी नागरानी, यूके
dnangrani@gmail.com
पर जिनका काम ही कम्प्यूटर हो?
उदंती के दिसंबर अंक में 'दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर खतरनाक हो सकता है।Ó यह जानकर राहत मिली कि यह बच्चों के लिए नुकसान देह है। हालांकि हम भी कहां इतना बैठ पाते हैं और जिनका काम ही कम्प्यूटर हो वे?
- डॉ. आर. रामकुमार,
rkramarya@gmail.com
गागर में सागर
नि:संदेह उदंती गागर में सागर भरने का काम कर रही है। आप एक छोटी सी पत्रिका में देश और दुनिया भर को समेट तो रही ही हैं साथ ही कालजयी रचनाओं को सामने लाने की महती भूमिका भी निभा रही हैं। हिन्दी की यादगार कहानियों का स्तंभ उन रचनाओं को फिर से पढऩे का सुख प्रदान कर रहा है जिनकी यादें कुछ धुंधली सी पड़ गई थीं। दंडकारण्य के एक संत कवि लाला जगदलपुरी से राजीव रंजन की बातचीत, अश्विनी केशरवानी का लिखा छत्तीसगढ़ के रमरमिहा तथा प्रताप सिंह राठौर का पत्र ब्रूस मिलसम की समुद्री यात्रा इस अंक की अन्य विशेष रचनाएं हैं। दिसंबर अंक में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को जिस प्रमुखता और साज- सज्जा के साथ प्रस्तुत किया गया है वह काबिले तारीफ है। बधाई।
-जयवंत राही, सिहोर म.प्र.
jayraahi@gmail.com
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गर हाथों में जुम्बिश नहीं, आंखों में तो दम है। रहने दो सागरों- मीना मेरे आगे।। -गालिब
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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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