January 29, 2011

रंग बिरंगी दुनिया

मुर्गों को पहनाया चश्मा

आपने इंसानों को चश्मा पहनते तो खूब देखा और सुना होगा, पर क्या कभी मुर्गों को चश्मा पहनते देखा या सुना है! यदि नहीं, तो हम आपको बता दें कि मुर्गे भी चश्मा पहनते हैं। अब आप कहेंगे कि भला मुर्गो को कौन चश्मा पहना सकता है, लेकिन चमत्कारों के देश चीन में कुछ भी संभव है।
जी हां ड्रैगन के देश चीन में मुर्गों को चश्मा पहनाया जाता है, ताकि वे आपस में लडऩा बंद कर दें। चीन के मुर्गी पालकों का कहना है कि ऐसा करने से मुर्गे वास्तव में आपस में लडऩा बंद कर देते हैं। दक्षिण- पश्चिम चीन के चेंगदू प्रांत में मुर्गों की आंखों पर चश्मे जैसी चीज पहना दी जाती है। वहां के एक मुर्गा पालक के मुताबिक, चीन में मुर्गे स्वभाव से बहुत लड़ाकू होते हैं। मुर्गे हमेशा एक- दूसरे पर हमला करते रहते हैं। ये कई बार गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। और जब उन्हें चश्मा पहना दिया जाता है तो वे चश्मे के कारण एक- दूसरे को ठीक से नहीं देख पाते, जिसके चलते इनमें लड़ाई की संभावना कम हो जाती है। चेंगदू प्रांत की देखा- देखी अब अन्य राज्यों के मुर्गी पालक भी अपने मुर्गों को लड़ाई से बचाने के लिए यह तरकीब अपना रहे हैं। वैसे मुर्गों को चश्मा पहनाने की परंपरा 1939 से चली आ रही है, लेकिन इन दिनों काफी लोकप्रिय हो गई है। इसे एंटीपिक्स कहा जाता है। ये चश्मे कम पारदर्शी और लाल रंग के होते हैं। इससे मुर्गों को खून नहीं नजर आता और उनका गुस्सा शांत रहता है। वैसे मुर्गों का गुस्सा शांत रखने की यह तरकीब है काफी रोचक।
71 किलो की अंगूठी
पाकिस्तान हमेशा आतंकवाद और विस्फोट की खबरों के लिए जाना जाता है। लेकिन आजकल वह एक रोचक खबर के लिए जाना जा रहा है। आप सोच रहे होंगे कि ऐसी क्या बात हो गई। दरअसल बात यह है कि पाकिस्तान में चांदी की एक अंगूठी बनाई गई है जिसका वजन 71.68 किलोग्राम है। इस अंगूठी को 10 कारीगरों ने 70 से ज्यादा दिन की मेहनत के बाद बनाया। इस विशाल और अनोखी अंगूठी को गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया है।
लाहौर के पुराना शहर इलाके के रहने वाले मोहम्मद अमीन सलीम कहते हैं कि इस अंगूठी का भीतरी व्यास 85 सेंटीमीटर है। इसका निर्माण 97.83 प्रतिशत शुद्ध चांदी से किया गया है। सलीम कहते हैं, 'मैंने पहले भी 74.6 किलो की अंगूठी बनाई थी, लेकिन उसे गिनीज बुक में शामिल नहीं किया गया था। तब मैंने एक और अंगूठी बनाने का फैसला किया और मैंने गिनीज से सही विशिष्टताओं की जानकारी ली, ताकि इस बार मेरी अंगूठी बुक में शामिल की जा सके।'
अब, इसकी कीमत पर गौर फरमाइए। जरा सोचिये भारत में एक किलो चांदी कि कीमत यदि 45,195 रुपया है, तो इसकी कुल कीमत क्या होगी। इस चांदी की अंगूठी की कीमत लगभग 32,08,845 रुपए है।
चोरी के तरीके सिखाने वाली पुस्तक
जापान में एक चोर हाजिमे करासूयामा ने चोरी के तरीके सिखाने वाली एक पुस्तक लिखी है। पुस्तक का नाम है 'पेशा, चोरी, सालाना आमदनी 30 लाख येन'। इस पुस्तक की बिक्री ने धूम मचा रखी है। इसकी 10,000 प्रतियां 10 दिन में बिक गई हैं। लेखक ने पुस्तक में ताले बंद मकानों में घुसने के तरीके सिखाते हुए चोरी के बाद बिना सबूत छोड़े चोरी के माल के साथ सुरक्षित निकल जाने के अनेक तरीके सिखाए हैं। लेखक ने आगाह किया है कि वे अपने चोरी करने के कौशल की कापीराइट करवाएंगे।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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