September 22, 2010

...ऐसे तो ब्रिटेन के म्यूजियम खाली हो जाएंगे

यदि वह एक कोहिनूर को वापस करने के लिए हां बोलते हैं तो हो सकता है कि एक- एक कर सारी लूटी हुई वस्तुओं की मांग भारत करने लगे, फिर तो ब्रिटेन के सारे म्यूजियम खाली होने ही हैं।

- लोकेन्द्र सिंह राजपूत
सुना है कि ब्रिटेन को फांके पड़ रहे हैं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था बदहाल है। पिछले दिनों ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन पहली बार भारत आए तब उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन की डूबती नैया के लिए सहारा जुटाना था। कैमरन भारत के साथ व्यापार बढ़ाना चाहते हैं और 600 अरब रुपए के सौदे को भुनाने की ताक में थे। जिसमें उन्हें कामयाबी हासिल हुई।
चलिए शीर्षक से जुड़े विषय पर आते हैं। कैमरन ने एक अंग्रेजी खबरिया चैनल को साक्षात्कार दिया है। साक्षात्कार में डेविड कैमरन उस वक्त सोच में पड़ गए, जब साक्षात्कारकर्ता ने उनसे प्रश्न किया- 'भारत सरकार यदि ब्रिटेन से कोहिनूर मांगता है तो क्या ब्रिटिश सरकार कोहिनूर दे सकेगी?' प्रश्न सुनते ही वे टेंशन में आ गए और सोच- विचारने वाली मुद्रा में बैठ गए। थोड़ी देर बाद बोले- 'यह तो संभव नहीं है, क्योंकि एक के लिए हां बोला तो ब्रिटेन का सारा म्यूजियम खाली हो जाएगा।' उन्होंने ठीक ही कहा। वैसे तो यह मुद्दे से इतर जाने का अच्छा जवाब था, लेकिन बहुत कुछ सच तो इसमें भी छुपा था। वो यूं कि, कैमरन का कहना था, यदि वह एक कोहिनूर को वापस करने के लिए हां बोलते हैं तो हो सकता है कि एक- एक कर सारी लूटी हुई वस्तुओं की मांग भारत करने लगे, फिर तो ब्रिटेन के सारे म्यूजियम खाली होने ही हैं। क्योंकि ब्रिटेन के म्यूजियम लूटी हुई चीजों से ही भरे और सजे पड़े हैं। दो सौ साल बहुत होते हैं किसी देश को लूटने के लिए। ब्रिटेन व्यापार का
बहाना लेकर इस देश में घुसा और फिर धीमे-धीमे उसने लूटमार मचाना शुरू किया जो करीब दो सौ साल चला। उसी दो सौ साल में जो कुछ लूटा उसमें से आंशिक ही हिस्सा है जो ब्रिटेन के म्यूजियमों की शोभा बढ़ा रहा है। बाकी का बहुत सारा कहां, किस ब्रिटिश कंपनी के अफसर के पेट में और अन्य जगह खप गया होगा पता नहीं।
इतना ही नहीं सवाल और जवाब के बीच उन्होंने यह भी सोच लिया होगा कि अगर ब्रिटेन भारत के लिए हां करता है तो बाकी के भी देश तो अपनी चीजें वापस मांग सकते हैं, जो कभी अत्याचारी ब्रिटिश उपनिवेश के गुलाम हुआ करते थे। इस तंगहाली के दौर में अगर सबने अपनी-अपनी चीजें मांगनी शुरू कर दीं तो ब्रिटेन नंगा हो जाएगा।
इस मामले से मुझे याद आया कि अक्टूबर 2007 में पी. चिदंबरम ने कहा था कि भारत तो कभी सोने की चिडिय़ा रहा ही नहीं। वे उस समय वित्त मंत्री हुआ करते थे। मुझे उस समय चिदंबरम की बुद्धि पर बड़ा आश्चर्य हुआ था कि पता नहीं इतना बड़ा सच पी. चिदंबरम साहब कहां से खोज लाए हैं? बचपन से तो हम यही पढ़ते आ रहे थे कि इस देश में अकूत संपदा थी जिसे समय- समय पर लुटेरों ने लूट लिया। हाथी, घोड़ों और ऊंटों पर लादकर ले गए। इतना ही नहीं कई आक्रांताओं ने तो बार-बार लूट मचाई। चिदंबरम द्वारा उद्घाटित यह सच तो उन वामपंथियों बुद्धिजीवियों और इतिहासकारों की नजरों से भी ओझल रहा, जो समय-बेसमय भारत को दीन-हीन और असभ्य बताते रहे हैं। चिदंबरम साहब को उस वक्त मैंने अपने शहर के एक प्रतिष्ठित अखबार में पत्र संपादक के नाम पत्र लिखकर पूछा था कि .....
-अगर भारत गरीब और कंगाल था तो क्यों विभिन्न आक्रांताओं ने इस देश पर बार-बार आक्रमण किया?
- क्यों बाब, तैमूर लंग और मुहम्मद गजनी, मुहम्मद गौरी आदि ने भारत में लूट मचाई?
- भारत गरीब था तो क्यों ईस्ट इंडिया कंपनी यहां व्यापार के लिए आई और नंगो-भिखारियों के देश में दो सौ साल तक क्या करती रही?
इन सवालों की गूंज पी. चिदंबरम के कानों तक तो उस समय न पहुंची होगी, लेकिन उम्मीद करता हूं कैमरन ने जो कहा उस पर तो उन्होंने गौर किया ही होगा।
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लोकेन्द्र सिंह राजपूत पत्रकर हैं। फिलहाल पत्रिका समाचार पत्र समूह ग्वालियर संस्करण में सिटी डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। राष्ट्रवादी सोच की संस्थाओं के साथ उनका गहरा जुड़ाव है। देश की सम- सामयिक मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। उनका पता है - गली नंबर-1 किरार कालोनी, एस.ए.एफ. रोड, कम्पू, लश्कर, ग्वालियर (म.प्र.) ४७४००१ मोबाइल नं. 9893072930 ईमेल :lokendra777@gmail।com
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