September 21, 2010

सबसे बड़ा और सबसे छोटा


यह दुनिया बड़ी अजीब है कहीं छोटा तो कहीं बड़ा जी हां आइंस्टाइन जहां दुनिया का सबसे छोटा घोड़ा है वहीं कैरिन वेबर के पास दुनिया का सबसे लंबा कुत्ता है।
सात फुट लंबा कुत्ता देखा है
यदि आपके पास पास दुनिया का सबसे लंबा कुत्ता होगा तो आप गर्व तो महसूस करेंगे ही ना। ऐसा ही गर्व महसूस करती हैं दक्षिण कैसल्टन, नॉर्थ डकोटा (अमेरिका) की निवासी कैरिन वेबर। वे अपने इस लंबे कुत्ते का नाम 'गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड' में भेजना चाहती हैं। लैंडसियर न्यूफाउंडलैंड प्रजाति का यह कुत्ता लगभग 180 पाउंड का है और नाक से लेकर पूंछ तक की इसकी लंबाई सात फुट है। कंधे तक इसकी पूरी ऊंचाई है 36 इंच यानी लगभग तीन फुट!
काले और धूसर बालों से भरा यह झबरीला कुत्ता जब किचन में घुसता है तो लगता है जैसे खुद ही किचन टेबल से खाना लेकर खा लेगा और सिंक में बर्तन भी खुद ही धो लेगा! कैरिन वेबर का दावा है कि उनका यह लाड़ला कुत्ता दुनिया का सबसे लंबा कुत्ता है। इससे पहले गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में जिस कुत्ते का नाम दर्ज था, वह था, ग्रेट डेन। इसकी कंधे तक ऊंचाई थी, 42 इंच।
आइंस्टाइन दुनिया का सबसे छोटा घोड़ा
आपने कभी सोचा भी न होगा कि एक नवजात बच्चे के वजन के समान ही नवजात घोड़े का वजन भी हो सकता है। ऐसा हुआ है ब्रिटेन के न्यू हैम्पशायर के बर्नस्टीड में। यहां जन्में इस नवजात घोड़े वजन जन्म के समय 2.7 किलोग्राम और ऊंचाई केवल 14 इंच दर्ज किया गया था। इस नर घोड़े का नाम 'आइंस्टाइन' रखा गया है।
टिज मिनिएचर हॉर्स फार्म में जन्मे इस घोड़े का आकार आश्चर्यजनक है, यह दूसरे नवजात घोड़ों की तुलना में अत्यंत छोटा है और इसे दुनिया के सबसे छोटे घोड़े के रूप में दर्ज करवाया जा सकता है।
इस खूबसूरत और हैरतअंगेज घोड़े आइंस्टाइन के मालिक रसेल वॉगनर का कहना है कि यह घोड़ा गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड में दर्ज चार किलोग्राम के सबसे छोटे नवजात घोड़े से बहुत छोटा है। यानी आइंस्टाइन दुनिया का सबसे छोटा घोड़ा आसानी से बन सकता है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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