September 21, 2010

नींद में भी पढ़ाई

वे परीक्षार्थियों जो परीक्षा के दिनों में रात में अपनी पढ़ाई पूरी करके सोते हैं, लेकिन सुबह होते- होते वह कई चीजें भूल जाते हैं। ऐसे छात्रों के लिए ही एक जादुई तकिया बनाया गया है जो उन्हें रात-रात भर जागकर पढ़ाई करने से निजात दिलाने में मदद करेगा। यह जादुई तकिया सोते वक्त छात्रों को पहले से रिकार्ड करे गए नोट्स और पाठ को पढ़कर सुनाता है। जिससे सोने वाले की नींद में भी शब्द कान में पड़ते रहें।

तकिए में साउंड डिवाइस लगाने की यह तकनीक पिछले साल अमेरिका में किए गए एक अध्ययन के बाद काफी लोकप्रिय हो गई है। हालांकि अध्यापकों ने ऐसे तकियों का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है।
इस अनोखे तकिए को बनाने वाले डिजायनर का दावा है कि यह तकिया पहले से रिकॉर्ड किए गए कक्षा के पाठ्यक्रम और छात्रों द्वारा बनाए गए नोट्स उन्हें रात भर सुनाएगा। जिससे सुबह उठने के बाद भी उन्हें याद रहेंगी। उन्होंने बताया कि 20 पौंड (करीब 13 सौ रुपए) के इस तकिए के फाइबर में एक स्पीकर लगाया गया है। इसे एमपी-3 और सीडी प्लेयर से भी जोड़ा जा सकता है। अगर कोई खर्राटे की समस्या से पीडि़त है, तो उसका जीवन-साथी भी इस तकिये की मदद ले सकता है। यह तकिया रात भर हल्का संगीत सुनाएगा, जिससे खर्राटे नहीं सुनाई देंगे।
तो परीक्षार्थी लीजिए हो जाईए खुश और परीक्षा के समय चैन की नींद लीजिए। न पढऩे की झंझट न रात भर जागने की। मान गए भई दुनिया के रंग निराले हैं! अब समझने वाली बात तो यह है कि यदि नींद में सब कुछ याद रहेगा तो फिर लोग पढ़ाई ही क्यों करेंगे। लगता है मनुष्य स्वयं ही अपने दिमाग को कुंद करने में लगा हुआ है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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