April 19, 2010

उम्मे सलमाः प्रकृति के साथ बंधन

चित्रकला को अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना लेने वाली उम्मे सलमा अपनी पहली चित्र प्रदर्शनी की सफलता से बेहद प्रसन्न हैं। प्रकृति उनके चित्रों में प्रमुखता से दिखाई देते हैं, खासतौर पर रंग- बिरंगे फूलों के माध्यम से वे अपनी बात बहुत ही सहज ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। हमने उदंती के पिछले अनेक अंकों में कई प्रतिभाशाली चित्रकारों से अपने पाठकों को रू-ब-रू कराया है और उनके चित्रों से उदंती के विभिन्न पृष्ठों को सजाया संवारा है। इस बार के अंक में प्रस्तुत है ऐसी ही एक उभरती कलाकार उम्मे सलमा -
म्मे स्कूल के दिनों से ही कुछ अलग, कुछ नया करने का जूनून था। वह कभी भी औरों की तरह परीक्षा के हौवे, अधिक नंबरों और डिग्री की उत्कंठा को अपने जीवन में प्राथमिकता नहीं दे पाई। बचपन से उसे रंगों में अपने मन के द्वार खोलने का माध्यम दिखाई दिया। पढ़ाई को जारी रखते हुए उम्मे ने रंगों से खेलना शुरू कर दिया। बेटी के इस शौक को परिवार का भी पूरा सहयोग मिला और घरवालों की मंजूरी और बढ़ावे की मदद से उम्मे ने ब्रश और रंगों की बारिकियों को सीखा और समझा।
उम्मे ने अपनी पेटिंग्स की पहली प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हस्त शिल्प विकास मंडल के हाट परिसर में लगाई थी। उनकी यह प्रदर्शनी प्रकृति पर आधारित थी। प्रदर्शनी का नाम भी लिगेचर विद नेचर अर्थात प्रकृति के साथ बंधन रखा गया था। जिसमें प्रकृति से जुड़ी कई जानकारियों के साथ उससे हो रही छेड़छाड़ को भी बखूबी दर्शाया था। यह विषय चुनने के पीछे सलमा ने बताया कि प्रकृति के अंदर वही जोश वही जुनून है जो स्वयं उनके अंदर है। पतझड़ एक सच्चाई है, लेकिन इसके बावजूद आने वाले भयावह अंजाम से बेखबर प्रकृति बसंत का स्वागत मुस्कुरा कर करती है। प्रकृति द्वारा रचित रंगों की यह खूबसूरत दुनिया उन सारे दुख, दर्द और अवसाद से दूर ले जाती है जो हमारे आसपास छाए हुए हैं।
उम्मे की यह सोच दर्शाती है कि उसके अंदर संवेदना और आत्मविश्वास का सम्मिश्रण कितने प्रबल रूप में स्थापित है। उम्मे कहती हैं अगर प्रकृति में ये खूबसूरत रंग ये दृश्यावली हमारे सामने नहीं होते, तो दुनिया कितनी नीरस हो जाती। पेटिंग्स उम्मे के लिए किसी मंजिल को पाने का रास्ता नहीं बल्कि खुद मंजिल है।
उम्मे कहती हैं कि हर मनुष्य के जीवन में उतार- चढ़ाव आते हंै। प्रकृति भी इससे अछूति नहीं है। उम्मे सलमा ने अपने चित्रों में इसी बात को कहने की कोशिश की है। उनके चित्र का एक दूसरा पहलू भी है। वह ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता है। उनके कुछ चित्रों में यह बताया गया है कि यदि प्रकृति की रक्षा नहीं की गई, तो मनुष्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
अपनी पहली ही प्रदर्शनी में उम्मे ने अपने गुरु उमेश शर्मा की बनाई पेटिंग्स को भी सम्मिलित कर यह साबित किया है कि विनम्रता और गुरु का सत्कार ही एक अच्छा कलाकार पैदा कर सकता है।
चित्रकला को कैरियर बनाने की चाह में उम्मे पिछले पांच वर्षों से चित्रकारी कर रही हैं। अपनी पसंदीदा पेंटिंग्स के बारे में उम्मे का कहना है कि मेरी सबसे पसंदीदा पेटिंग का मैंने अब तक नाम नहीं सोचा है, पर इस पेटिंग की फिलिंग मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। मैंने अपनी इस पेटिंग में डार्क पिंक कलर का उपयोग कर पत्ते से गिरने वाली ओस की बूंद से सुबह की खूबसूरती को दिखाया है।
उमे सलमा बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही पेटिंग्स का शौक रहा है। पहले वह रेखाचित्र बनाया करती थी। उसके बाद इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से एक साल का डिप्लोमा कोर्स किया। इस कोर्स के बाद उमेश शर्मा से पेटिंग्स की टे्रनिंग ली।
चित्रकला जैसे कठिन क्षेत्र में जहां बहुत अधिक संघर्ष है को अपना कैरियर बनाने के निर्णय पर उम्मे का कहना है कि कहीं न कहीं से शुरुआत करना तो जरूरी है, और मन में सच्चा विश्वास हो तो जरूर सफलता मिलेगी।
उम्मे ने बी.काम. के बाद एच.आर. में पी.जी. किया। इसके बाद दो साल तक नौकरी भी की। लेकिन उनका मन तो चित्रकारी में रम चुका था सो सब कुछ छोड़कर चित्रकला के क्षेत्र में ही नाम कमाने और कुछ नया कर गुजरने की चाह लिए उम्मे ने पिछले पांच साल से चित्रकला को ही अपनी दुनिया बना ली।
आगे की योजनाओं के बारे में उम्मे का कहना है कि वे अब दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भी अपनी चित्र प्रदर्शनी लगाने के बारे में सोच रही हैं, उन्हें विश्वास है कि वहां भी उन्हें सफलता हासिल होगी। पेटिंग के साथ उम्मे को एडवेंचर्स स्पोट्र्स का भी शौक है। वे फोटोग्राफी का शौक भी रखती हैं। (उदंती फीचर्स)
संपर्क- ई-12, सेक्टर 3, देवेन्द्र नगर, रायपुर (छग)
मो. 09977186008 ईमेल- ubharmal19@gmail.com

2 Comments:

Unknown said...

wonderful start for an artist, Keep it up Umme and all the very best for ur future.

Unknown said...

umme ur paintings r awesome. i really liked it.
congrats 4 ur sucsess n all d best 4 ur future.

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष