December 02, 2009

ग्लू ने बचा ली एलाग्रेस की जिंदगी


यह बात आपको अटपटी लग सकती है कि दिमाग के अंदर स्थित रक्त के रिसाव को रोकने के लिए एक खास किस्म के गोंद (ग्लू) का सफलता पूर्वक प्रयोग किया जाए। जी हां, बीते दिनों अमेरिकन सर्जनों ने मात्र 11 महीने की बच्ची की जान बचाने के लिए उसके मस्तिष्क के अंदर स्थित सूक्ष्म रक्तवाहिनियों से होने वाले रक्त के रिसाव को रोकने के लिए एक खास किस्म के गोंद का प्रयोग किया। यह प्रयोग सफल रहा। ब्रिटिश मूल की इस लड़की का नाम है- एलाग्रेस हनीमन। बच्ची के पैदा होने के बाद डॉक्टरी परीक्षणों से यह पता चला कि इसके दिमाग की रक्त वाहिकाओं में छोटे-छोटे छेद हैं। इस बच्ची को जो तकलीफ थी उस तरह के मामलों की संख्या दुनियाभर में प्रतिवर्ष चंद सैकड़ा से ज्यादा नहीं है। डॉक्टरों की राय में एला ग्रेस सिर्फ कुछ महीने ही जिंदा रह सकती थी। कारण, रक्त वाहिनियों से रक्त बाहर रिसकर कपाल या खोपड़ी की सूक्ष्म कैविटी में प्रवेश करने लगा था, इस कारण बच्ची के दिमाग की धमनी असाधारण रूप से फूल गयी थी। इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में एन्यूरिज्म कहते है। यह स्थिति बच्ची की जिंदगी को संकट में डाल रही थी। इसलिए इस नाजुक हालत में डॉक्टरों ने जोखिम लेकर एला का ऑपरेशन करने का फैसला किया और इस खास किस्म के ग्लू ने उसे बचा लिया।
बिना तेल से जब उड़ेंगे विमान
दुनिया में बढ़ते वाहन प्रदूषणों से बचने के लिए अब ईधन के विकल्प के बारे में सोचे जाना लगा है। सड़कों पर चलने वाली कई गाडिय़ां अब सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने लगी हैं, इसी तरह विमान को उड़ाने के लिए ईधन का विकल्प ढूंढा गया है।
जरा सोचिए, अगर बिना तेल की टंकी भरे कोई विमान आसमान में उड़ता नजऱ आए तो कैसा लगेगा। जी हां, अब एक ऐसे विमान को उड़ाने की तैयारी की जा रही है। ईधन की ज़रूरत को पूरा करने के विकल्प के तौर पर इस विमान में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा।
सौर ऊर्जा से चलने वाले विमान का मॉडल पूरी दुनिया का चक्कर लगाने के लिए उड़ चुका है। इस विमान की वास्तविक उड़ान फरवरी में प्रस्तावित है और इसका अंतिम स्वरूप 2012 में अटलांटिक महासागर को पार करने की कोशिश करेगा।
विमान की चौड़ाई हालांकि जंबो जेट विमान जितनी है लेकिन इसका वजन मात्र 1,500 किलोग्राम है और इसके चालक हैं स्वीडन के पायलट बर्टेंड पिकार्ड। सोलर इंपल्स के मुख्य अधिशाषी एंड्रे बोर्शबर्ग का कहना है, 'ये बहुत ही रोमांचक है, हम अब काफी ठोस स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। आपको इस विमान की खूबियों को महसूस करना चाहिए और अब इसे ज़्यादा देर तक ज़मीन पर खड़ा नहीं रखा जा सकता।' बोर्शबर्ग ने कहा कि अगर सब कुछ संतोषजनक रहता है तो हम इसे फरवरी में कऱीब दो घंटे की उड़ान के लिए इजाज़त देंगे। लेकिन हरेक स्तर पर काफी सावधानी बरती जाएगी।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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