June 05, 2019

प्रकृति संग सैर का सुख

प्रकृति संग
सैर का सुख
-विजय जोशी
(पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल, भोपाल)
  स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेहत मापने के दो तरीके सर्वविदित हैं। पहला बी॰ एम॰ आई॰ (बाडी  मास इंडेक्स) यानी शरीर की ऊंचाई एवं भार का अनुपात जो किसी भी हालत में 25 से ऊपर नहीं होना चाहिए। और दूसरा है एच॰ डब्ल्यू॰ (हाइट एवं वेस्टलाईन) अनुपात यानी कमर के घेरे तथा ऊंचाई का अनुपात ½ के अंदर। यह सब सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि एक बार वजन की लक्ष्मण रेखा क्रास हो जाए तो सीमा के अंदर पुन: लौट पाना काफी कठिन होता है।
  इस दिशा में सारे प्रयत्नों में पैदल चलना सर्वोत्तम माना गया है जो न केवल आपके हर अंग को चुस्त दुरुस्त रखता है अपितु वजन नियंत्रण पर भी अंकुश का काम करता है। सुबह की सैर का सुख अलौकिक होता है जब आपके साथ प्रकृति प्रत्यक्ष होती है। पर इसके लिए चाहिए उपयुक्त स्थान जो मात्र व्यवस्था के सहारे सृजित नहीं हो सकता। जन जागरूकता एवं भागीदारी भी इसका एक प्रमुख अवयव है।
  अमेरिकी प्रवास के दौरान मुझे विस्कांसिन प्रदेश स्थित मार्शफील्ड नगर में एक व्यक्ति के एकल अभियान से सृजित एक नेचर पार्क में सैर का अद्भुत अनुभव प्राप्त हुआ। लगभग 200 एकड़ में वन को कैसे एक सुव्यवस्थित पार्क में परिवर्तित किया जा सकता है उसका यह उत्क्रष्ट उदाहरण है। जो बर्नाडीनवेवर्सनेचर पार्क के निर्माण का श्रेय जाता है डेनउमहोमर नामक सज्जन को। डेन ने लगभग 200 एकड़ में फैले वन को संवारने का एक प्लान नगर की मास्टर प्लान कमेटी को प्रस्तुत किया तथा वहाँ की कार्यपालिका के सकारात्मक सोच से उपजी अनुमति प्राप्ति के तुरंत ही बाद अपने अकेले के दम या यूँ  कहें कि एकला चालो की तर्ज पर ले आउट बनाकर सुधार तथा पौधारोपन का कार्य शुरू कर दिया। जंगल में अलग अलग दूरी के जंगल ट्रेल बनाने का कार्य प्राथमिकता में सम्मिलित था। तमाम झाड़ियां साफ कीं। इसमें उसने सहयोग लिया अपने मित्रों, नज़दीक स्थित गृह स्वामियों का और इस तरह अपना अभियान जारी रखा। इस काम में वर्ष 2004 के बाद अकेले डेन के कार्य घंटे 800 से अधिक थे। लोगों ने उन्हें इस काम में सतत एकलव्य की तर्ज पर एकाग्र पाया। इसी का परिणाम यह हुआ कि घने पेड़ों से घिरा यह अस्त व्यस्त जंगल आज जन सहयोग एवं व्यवस्था की सकारात्मक मानसिकता के कारण एक सुव्यवस्थित प्राकृतिक पार्क में परिवर्तित हो गया है। 
  इसकी विशेषता यह है कि यहाँ पर सैर के लिए अलग अलग जंगल ट्रेल बने हुए हैं जिनमें आपकी सहूलियत के लिए तय की जा सकने वाली दूरी एक बड़े नक्शे पर प्रदर्शित है मार्ग दर्शन  सूचना सहित। आप अपनी सुविधा एवं क्षमता के अनुसार ट्रेल का चुनाव कर सकते हैं। आज यह प्रमुख आकर्षण का केंद्र है घने जंगल में निर्भय विचरण हेतु। यही नहीं एक छोटा सा तालाब भी बनाया गया है यहाँ पर। बैठने, समूह द्वारा खाना बना सकने या पिकनिक की सुविधा अतिरिक्त। पुरुषों,महिलाओं एवं दिव्यांगों के लिए साफ सुथरे रेस्ट रूम व्यवस्था द्वारा जिनकी हर दिन सफाई सुनिश्चित की गई है। इसे ही तो कहा गया है
मैं अकेला ही चला था जानिबे- मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनाता गया
सम्पर्क: 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास), भोपाल- 462023, मो. 09826042641,
E-mail- v.joshi415@gmail.com

1 Comment:

Unknown said...

Very well executed efforts, for the benefit of human beings and nature.

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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