September 18, 2016

जीवन परिचय

                बृजलाल वर्मा

         पलारी गाँव से दिल्ली तक की यात्रा

पिता-  कलीराम वर्मा
जन्म- १६ मार्च १९१६, ग्राम पलारी जिला- बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
मृत्यु- २० जुलाई १९८७
शिक्षा- प्राइमरी शिक्षा-  गृहग्राम- पलारी, जिला बलौदाबाजार (छ.ग.)
८वीं- पं. माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा संचालित सेवा सदन, हिरनखेड़ाहोशंगाबाद (म. प्र.)
मिडिल बोर्ड परीक्षा- गवरमेंट हाई स्कूल खंडवा (म. प्र.)
मेट्रिक-  पं. मदनमोहन मालवीय द्वारा संचालित सेंट्रल हिन्दू स्कूल बनारस (उ.प्र.),
(बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी)
इंटरमीडिएट- सिटी कॉलेज, जबलपुर (म. प्र.),
बी. ए., एल. एल बी.- मॉरिस कॉलेज, नागपुर, महाराष्ट्र (नागपुर विश्वविद्यालय)
सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-
-१९४२ के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब वे मॉरिस कॉलेज, नागपुर में कानून की पढ़ाई कर रहे थे तब आंदोलन की गतिविधियों मे संलग्न रहने के कारण एक वर्ष परीक्षा से वंचित किया गया था।
-१९४४ से बलौदा बाजार में वकालत शुरू की। उन्होंने वकालत को पेशे के रूप में कभी नहीं अपनाया, इसे शोषण के विरूद्ध लड़ाई का माध्यम बनाया।
-इसी दौरान वे सहकारी आंदोलन से जुड़े और उन्होंने किसानों में जागृति लाने का बीड़ा उठाया। इस आंदोलन के नेतृत्व के दौरान वे जेल भी गए।
-पलारी को जिले का पहला विकास खंड ब्लाक बनाने का श्रेय।
-सुभाष सहकारी विपणन संस्था पलारी की स्थापना।
-किसान राइस मिल पलारी की स्थापना एवं मिल हेतु जमीन दान।
-अपनी पुश्तैनी सम्पत्ति- बालसमुंद जलाशय पलारी को किसानों के हित में राज्य शासन को सौंपा।
-सिद्धेश्वर मंदिर पलारी (८वीं शताब्दी) का जीर्णोद्धार एवं बालसमुंद जलाशय का घाट निर्माण।
-पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म कहि देबे संदेश (१९६५) के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान, गृह ग्राम पलारी में फिल्मांकन।
विधानसभा, लोकसभा सदस्य-
-१९५२ से १९७२ तक विधानसभा सदस्य एवं केबिनेट मंत्री
-१९५२ आजादी के बाद प्रथम आम चुनाव में विधानसभा पलारी क्षेत्र से चुने गए।
-१९५७ दूसरे आम चुनाव में भी विधायक चुने गए।
-१९६२ तीसरे आम चुनाव में भी अपने क्षेत्र से जीत हासिल की।
-१९६७ से १९६८ - संविद शासन मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए नाम प्रस्तावित किया गया जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। तब अविभाजित मध्यप्रदेश के आठ विभिन्न विभागों के केबिनेट मंत्री रहे - सिंचाई, विधि, योजना, विकास, कानून, जेल एवं अन्य विभाग।
-१९७४ से १९७७ तक प्रदेश अध्यक्ष, जनसंघ- मध्य प्रदेश
-१९७५ में आपातकाल के दौरान वे २२ माह तक राजनैतिक मीसाबंदी के रूप में रायपुर, सिवनी, जबलपुर तथा तिहाड़ जेल दिल्ली में रहे।
-१९७७ के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी से महासमुंद से संसद सदस्य चुने गए।
-१९७७ से १९७९ -  भारत सरकार में उद्योग एवं संचार विभाग के केन्द्रीय केबिनेट मंत्री रहे।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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