December 14, 2013

गज़ल़ें

आशीष दशोत्तर

१. कतार में


सिमटा है सारा मुल्क ही कोठी या कार में,
आशीष तो खड़ा हुआ कब से कतार में।

बाज़ार दे रहा यहाँ ऑफर नए-नए,
ख्वाबों की मंजिलें यहाँ मिलती उधार में।

मिलते रहे हैं रोज ही यूँ तो हज़ार लोग,
मिलता नहीं है आदमी लेकिन हजार में।

पल भर में मंजिलें यहाँ हसरत की चढ़ गए,
सँभले कहाँ है आदमी अक्सर उतार में।

जिसने ज़मी के वास्ते अपना लहू दिया,
गुमनाम कर दिये गए जश्ने-बहार में।

छू कर हवा गुज़र गई परछाई आपकी,
खुशबू तमाम घुल गई कैसी बयार में।

जज़्बात को निगल लिया मैसेज ने यहाँ,
आती कहाँ है ख्वाहिशें चिट्ठी या तार में।

आशीष क्या अजीब है मेरे नगर के लोग,
अम्नो-अमा को ढूँढ़ते खँजर की धार में।


२. कश्तियाँ कागज की

लफ्ज़ आए होठ तक हम बोलने से रह गए,
इक अहम रिश्ते को हम यूँ जोडऩे से रह गए।

अब शिकारी आ गया बाज़ार के ऑफर लिये,
फिर परिन्दे अपने पर को खोलने से रह गए।

हर कहीं देखी निगाहें आँसुओं से तरबतर,
खुद के आँसू इसलिए हम पोंछने से रह गए।

बारिशें तो थीं मगर बस्ते का भारी बोझ था,
कश्तियाँ कागज की बच्चे छोड़ने से रह गए।

बेरहम दुनिया के जुल्मों की हदें ना पूछिए,
शाख पर वे फल बचे जो तोड़ने से रह गए।

आज फिर देखी किताबें-जि़न्दगी आशीष तो,
पृष्ठ कुछ ऐसे मिले जो मोड़ने से रह गए।


लेखक के बारे में: - जन्म -05 अक्टूबर 1972, शिक्षा - 1.एम.एस.सी. (भौतिक शास्त्र), एम.ए. (हिन्दी), एम.एल.बी., बी.एड, बी.जे.एम.सी., स्नातकोत्तर में हिन्दी पत्रकारिता पर विशेष अध्ययन। प्रकाशन - 1 मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा काव्य संग्रह-खुशियाँ कैद नहीं होती-का प्रकाशन।, ग़ज़ल संग्रह 'लकीरें, 3 भगतसिंह की पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक-समर में शब्द-प्रकाशित 4 नवसाक्षर लेखन के तहतकहानी की पाँच पुस्तकें प्रकाशित आठ वृत्तचित्रों में संवाद लेखन एवं पार्श्वस्वर। अनेक पुरस्कार एवं सम्मान।सम्प्रति - आठ वर्षों तक पत्रकारिता के उपरान्त अब शासकीय सेवा में। सम्पर्क- 39, नागर वास, रतलाम (म.प्र.) 457001, मो.098270-84966,  Email- ashish.dashottar@yahoo.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
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