April 13, 2013

हाइकु




पीले पत्ते थे, शाख ने गिरा दिए 
-प्रियंका गुप्ता
1
प्रेम का घड़ा
खाली है बरसों से
तुम भर दो।
2
तुम्हारा प्यार
रिमझिम बारिश
भीगा है मन।
3
प्रेम फ़साना
सुना ही तो रही थी
तुम सो गए।
4
मन की डोर
तुझ संग थी बाँधी
यूँ ही तोड़ दी।
5
दौड़ता आया
धूल की गठरी ले
हवा का घोड़ा।
6
गर्मी के मारे
तालाब में सो गया
बेचैन चाँद।
7
ढह ही गया
रेत के घर जैसा
रिश्ता हमारा।
8
थकी-माँदी-सी
टाँगें पसार कर
सोई थी धूप।
9
कुछ यादें थीं
तुमने बिखरा दीं
कैसे बटोरूँ?
10
पीले पत्ते थे
शाख ने गिरा दिए
कच्चा था रिश्ता।
11
आज़ाद पंछी
कब किसी का हुआ
झट से उड़ा।
12
परछाइयाँ
यहाँ-वहाँ बिखरी
दर्द से भरी।
13
जीवन-रेत
बंद मुठ्ठी से झरी
थामी न गई।
14
पूस की रात
मेरे साथ ठिठुरे
मेरा साया भी।
15
भूखा बालक
चाँद को निहारता
रोटी सोचता।
16
रिश्तों की धूप
आँगन में उतरी
सहला गई।
17
सजीला चाँद
दूल्हा बन कर आया
तारे बराती।
18
यादों के पन्ने
आँसू से गीले हुए
तो भी न फटे।
19
छूटी जो गली
अब लौट के आए
ढूँढे न मिली।
20
मैं इंसाँ बना
आँखों में आँसू आए
मुद्दतों बाद।
21
प्रकृति परी
फेरे जादू की छड़ी
बिखरे रंग।
22
काँपता चाँद
जाने कहाँ दुबका
पूस की रात।
23
कम्बल ओढ़े
ठिठुरता-काँपता
सूर्य झाँकता।
24
इंद्रधनुष
सात रंगों का मेला
रहे अकेला।
25
बेटा खज़ाना
बेटी पराया धन
कैसा है भ्रम!
                          
संपर्क- एम.आई.जी-292, कैलाश विहार,आवास विकास योजना संख्या- एक, कल्याणपुर, कानपुर-208017 (उ.प्र)
मो. 09919025046  Email- priyanka.gupta.knpr@gmail.com

1 Comment:

Unknown said...

komal samvednaon ki sunder abhivyakti ...meenakshijijivisha

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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