July 25, 2012

खोज: 10 नए अनोखे प्राणी

अभी 30 मई को वैज्ञानिकों ने वर्ष 2011 में खोजे गए जीव- जंतुओं और वनस्पतियों में सर्वोत्तम 10 प्राणियों के नामों की घोषणा की है ये क्रिया पांच वर्ष पहले प्रारंभ की गई है और प्रत्येक वर्ष यह घोषणा 23 मई को की जाती है। इस संदर्भ में 23 मई का महत्व यह है कि इसी दिन जीव जंतुओं और वनस्पतियों के नामांकन और वर्गीकरण को निर्धारित करने वाले स्वीडन के वनस्पति शास्त्री कैरोलस लीनियस का जन्म दिन भी है। 


1. पापुआ न्यूगीनी में एक ऐसी आर्किड पुष्प मिला है जो रात में 10 बजे के आस-पास खिलता है और सूर्योदय से पहले उसकी पंखुडिय़ां बंद हो जाती हैं। यह विश्व का एक मात्र रात में ख्रिलनेवाला आर्किड है।

2. चीन में करोड़ों वर्ष पुराना एक विचित्र नागफनी (कैकटस) की जीवाश्म (फासिल) मिला है। यह वनस्पति देखने में एक कांतर जैसा कीड़ा लगता है। जिसके पचासों पैर हों।

3. खूबसूरत झालरदार गुब्बारे की तरह दिखने वाला समुद्री जीव वास्तव में एक अत्यंत जहरीली जेलीफिश है।

4. अत्यंत आकर्षक दमकते हुए नीलेरंग का रोएंदार जिस्म वाला यह विशाल मकोड़ा (टेरेन्टुला) ब्राजील के पवर्तीय क्षेत्र में मिला है।

5. साढ़े छह इंच लम्बी यह विश्व की सबसे विशाल कांतर हैं।

6. स्पंज जैसी दिखने वाली यह चीज वास्तव में कुकुरमुत्ता (मशरूम) की एक नस्ल है। इसकी खासियत यह है कि मुट्ठी में दबाने से यह स्पंज की तरह सिकुड़ जाता है और मुट्ठी खोलने पर फिर से पहले वाले आकार में आ जाता है।

7. यह चित्र विश्व में धरती के सबसे ज्यादा गहराई में रहने वाले जीव का है। सिर्फ 0.5 मिलीमीटर लंबाई का यह कीड़ा दक्षिण अफ्रीका की 1.3 किलोमीटर गहरी सोने की खान की तलहटी में पाया गया।

8. यह खूबसूरत नेपाली पोस्ते का फूल (पापी) हजारों साल तक इसलिए अनजाना बना रहा क्योंकि यह पहाड़ों पर 11000 से 14000 फीट की ऊंचाई पर सिर्फ पतझड़ के मौसम में खिलता है।

9. ये परजीवी ततैया स्पेन में मिलती है। धरती से सिर्फ एक इंच ऊपर उड़ते हुए अपने शिकारी चीटों की तलाश करती है। चींटी देखते ही ये गोता लगाकर उस चींटे के बदन में अपना अंडा डाल देती है।

10. यह छींकने वाला बंदन बर्मा (म्यांमार) में पाया जाता है। काले बालों और सफेद दाढ़ी वाला ये बंदर पानी बरसने पर छींकता है। इस नस्ल का अस्तित्व संकटग्रस्त है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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