December 28, 2011

दुनिया के सात नए आश्चर्य!

दुनिया के इन सात नए आश्चर्यों को 2012 में औपचारिक तौर पर घोषित किया जाएगा
1 वियतनाम में हालोंग की खाड़ी
वियतनाम में हालोंग की खाड़ी में समंदर के बीच करीब 2000 चट्टानें सिर उठाए खड़ी हैं। यह खाड़ी 1994 से यूनेस्को की दुनिया के आश्चर्य की सूची में है। यूनेस्को न्यू सेवेन वंडर्स अभियान से खुद को अलग रखता है क्योंकि नए अभियान में सिर्फ वही लोग शामिल हो सकते हैं जिनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है।
2 दक्षिण कोरिया का येयुदो
कोरिया के दक्षिणी हिस्से में उपोष्ण कटिबंधीय ज्वालामुखी द्वीप येयुदो है। कई साल से सुप्त पड़े इस ज्वालामुखी में एक झील बन गई है जो देश के राष्ट्रीय उद्यान का केंद्र है। हाल ही में इसे दुनिया के नए सात आश्चर्यों में रखा गया है। दुनिया के यह सात आश्चर्य खोजने का अभियान निजी संस्था न्यू सेवेन वंडर्स ने शुरू किया है।
3 दक्षिण अमेरिका में अमेजॉन
दक्षिण अमेरिका में दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में एक अमेजॉन है। इस नदी में इतना पानी है कि इससे छोटी सात नदियों का पानी इसमें समा जाए। इसे भी विश्व के सात नए आश्चर्यों में रखा गया है। नए सात आश्चर्य ढूंढने के लिए दुनिया भर से लाखों लोगों ने अपना मत दिया।
4 ब्राजील का इगुआजु
ब्राजील के पराना में तीन किलोमीटर की ऊंचाई से इगुआजु नदी से पानी नीचे गिरता है। इगुआजु वॉटर फॉल को दो राष्ट्रीय उद्यान अपने इलाके में शामिल करना चाहते हैं। न्यू सेवेन वंडर्स ने भी इसके संरक्षण को अपने काम में शामिल कर लिया।
5 इंडोनेशिया का कोमोदो द्वीप
इंडोनेशिया का कोमोदो द्वीप विशालकाय छिपकलियों के लिए जाना जाता है। यह सरिसृप तीन मीटर लंबा और 70 किलो का हो सकता है। यही नहीं कोमोदो द्वीप अपने खूबसूरत पेड़ पौधों के लिए भी बहुत मशहूर है।
6 पुएर्तो प्रिंसेसा में धरती के नीचे नदी
फिलीपीन्स में दुनिया की सबसे लंबी ऐसी नदी है जो धरती के नीचे बहती है। इसके ऊपर एक बड़ा सा पहाड़ है। धरती के नीचे की इस नदी में ऐसे ऐसे जीव हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते।
7 दक्षिण अफ्रीका का पठार
केप टाउन के ऊपर दुनिया का सबसे मशहूर पठार है जो कई
लोगों के लिए दक्षिण अफ्रीका का प्रतीक चिह् है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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