September 10, 2011

राम के दरबार में

एक दिन एक कुत्ता श्रीराम के दरबार में आया और उसने प्रभु से शिकायत की- 'राजन, कितने दुख की बात है कि जिस राज्य की कीर्ति चहुंओर रामराज्य के रूप में फैली हुई है वहीं लोग हिंसा और अन्याय का सहारा लेते हैं। मैं आपके महल के पास ही एक गली में लेटा हुआ था तब एक साधू आया और उसने मुझे पत्थर मारकर घायल कर दिया। देखिए मेरे सिर पर लगे घाव से अभी भी रक्त बह रहा है। वह साधू अभी भी गली में ही होगा। कृपया मेरे साथ न्याय कीजिए और अन्यायी को उसके दुष्कर्म का दंड दीजिए।'
श्रीराम के आदेश पर साधु को दरबार में बुलवा लाया गया। साधू ने कहा - 'यह कुत्ता गली में पूरा मार्ग रोककर लेटा हुआ था। मैंने इसे उठाने के लिए आवाजें दीं और ताली बजाई लेकिन यह नहीं उठा। मुझे गली के पार जाना था इसलिए मैंने इसे एक पत्थर मारकर भगा दिया।'
श्रीराम ने साधु से कहा - 'एक साधु होने के नाते तो तुम्हें किंचित भी हिंसा नहीं करनी चाहिए थी। तुमने गंभीर अपराध किया है और इसके लिए दंड के भागी हो।' श्रीराम ने साधु को दंड देने के विषय पर दरबारियों से चर्चा की। दरबारियों ने एकमत होकर निर्णय लिया- 'चूंकि इस बुद्धिमान कुत्ते ने यह वाद प्रस्तुत किया है अतएव दंड के विषय पर भी इसका मत ले लिया जाए।'
कुत्ते ने कहा- 'राजन, इस नगरी से पचास योजन दूर एक अत्यंत समृद्ध और संपन्न मठ है जिसके महंत की दो वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। कृपया इस साधु को उस मठ का महंत नियुक्त कर दें।'
श्रीराम और सभी दरबारियों को ऐसा विचित्र दंड सुनकर बड़ी हैरानी हुई। उन्होंने कुत्ते से ऐसा दंड सुनाने का कारण पूछा।
कुत्ते ने कहा - 'मैं ही दो वर्ष पूर्व उस मठ का महंत था। ऐसा कोई सुख, प्रमाद या दुर्गुण नहीं है जो मैंने वहां रहते हुए नहीं भोगा हो। इसी कारण इस जन्म में मैं कुत्ता बनकर पैदा हुआ हूं। अब शायद आप मेरे दंड का भेद जान गए होंगे।'
((www.hindizen.com से )

मां चली गई तो क्या हुआ...

कंबोडिया के कोअक रोका गांव में एक 20 महीने का बच्चा गाय के थन से सीधे दूध पीकर जीवित है। इस बच्चे का नाम सोफेट है। सोफेट के दादा का कहना है कि जब दो माह पहले इसके माता-पिता काम की तलाश में थाईलैंड चले गए, तो उसने भूख लगने पर गाय के स्तन को चूसना शुरू कर दिया और अब यह गाय ही उसकी मां बन गई है।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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