July 12, 2011

आपके पत्र/ मेल बॉक्स

सारगर्भित पत्रिका

उदंती के नए अंक में भूले- बिसरे कथाकार भुवनेश्वर की कहानी मास्टरनी पढऩे मिली। पाठकों के लिए यह उपलब्धि है। यह कथाकार का शताब्दी वर्ष है। कम लोग ही जान पाते हैं वे कहानीकार के अलावा महत्वपूर्ण कथाकार भी थे। हालांकि उन्होंने कम लिखा है। भाई परदेशीराम वर्मा ने उन्हें याद कर पुण्य का कार्य किया है। शेरों के साथ अशोक सिंघई का संस्मरण याद रह जाने लायक है। श्रमसाध्य कार्य में आपकी सफलता दिखलाई दे रही है। समकालीन सोच के सांचे मे ढली सारगर्भित पत्रिका आकर्षक है। बधाई।
- रवि श्रीवास्तव, भिलाई नगर
गहरा कटाक्ष
सुभाष नीरव जी की लघुकथा कबाड़ भीतर तक दहला जाती है तो दूसरी ओर धर्म- विधर्म में जीवन के दोहरे मानदण्डों पर गहरा कटाक्ष किया गया है ।
- रामेश्वर काम्बोज, दिल्ली
rdkamboj@gmail.com
कविताओं की खासियत
अरुण जी की कविताओं की खासियत है कि वो वहाँ से देखना शुरु करते हैं जहाँ कोई देखना ही नहीं चाहता और उस चीज की अहमियत इस तरीके से दर्शाते हैं कि पढऩे वाला उसी में डूब जाता है।
- वंदना गुप्ता, दिल्ली
rosered8flower@gmail.com
उनके बाल छू लेने की ख्वाहिश ...
रश्मि जी आपके बचपन की यादों के साये में गुजरा वह पल आज भी वही सजीवता लिये हुये है... पंत जी ने आपका नाम ही नहीं रखा बल्कि नाम के साथ- साथ सहजता और लेखन की विशेषता भी आपके नाम कर दी जिसे आपकी लेखनी आज सार्थक कर रही है। इस प्रस्तुति के लिये बधाई।
- सदा, रीवा (मध्यप्रदेश)
मुझे खुशी हुई है ...
रश्मि प्रभा का लेख 'उनके बाल छू लेने की ख्वाहिश ...' पढ़ते- पढ़ते मैं खुद को इर्शान्वित महसूस कर रहा हूँ ... आप कितनी खुशकिस्मत हैं कि आपको ऐसे महान व्यक्तित्व का छाँव मिला ... और खुशी भी है कि मुझे आपका छांव (आपके संस्मरण के जरिये ही सही) मिल रहा है।
कविता पर कुछ भी कहना धृष्टता होगी ... बस पढ़ रहा हूँ और सीखने की कोशिश कर रहा हूँ ...
- इंद्रनील भट्टाचार्य, उड़ीसा
रश्मि जी के लिए
आपका संस्मरण पढ़ कर मन प्रफुल्लित हो उठा नीचे की पंक्तियां आपके लिए ...
प्रभात की प्रभा, सितारों की आभा।
दीप्तिमान कर रही हर राह।
करूं शत शत नमन, हर पल यही चाह।
- मृदुला हर्षवर्धन, गोरेगांव, हरियाणा
आप दमक उठीं
पंतजी जैसे पारस ने आपको स्पर्श किया और आप दमक उठीं... आपने इतनी बड़ी हस्ती को करीब से देखा जाना...
- सोनल रसतोगी, गोरेगांव, हरियाणा
शानदार अंक
उदंती का यह अंक बहुत ही शानदार रहा.... खासकर बाघों को लेकर जो सार्थक लेख आपने शामिल किए हंै वे बहुत पसंद आए। सुभाष नीरव जी की लघु कथाएं, जहीर कुरैशी जी के $ग•ाल, नवनीत कुमार गुप्ता की पानी को लेकर चिंता.... और संपादक ने अनकही में सब कह दिया।
- लोकेन्द्र सिंह राजपूत, ग्वालियर
lokendra777@gmail.com
स्वच्छता की जरूरत
'हम सब हाथ धोकर पीछे पड़ें हैं!' लेख में जो बातें कहीं गई हैं वो बिल्कुल सत्य है लेकिन फिर भी बढ़ते प्रदूषण ने इतने सारे वाइरस रच दिए हैं कि उसके संसर्ग से बचना बहुत ही मुश्किल है। इसलिए स्वच्छता की जरूरत आ पड़ी है। पहले जहां कभी दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी वहीं आज छोटे- छोटे बच्चे पेट की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं और वह भी सिर्फ हाथ की गंदगी की वजह से। मैं मानती हूं कि स्वच्छता के बहाने आज एक नए व्यवसाय को फलने फूलने का अवसर दिया जा रहा है। लेकिन सफाई को सफाई तक ही रखना चाहिए उसको एक इशु नहीं बनाना चाहिए।
- रेखा श्रीवास्तव, कानपुर
rekhasriva@gmail.com


0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष