March 21, 2011

एक पार्क केवल महिलाओं का

इस पार्क को थानटेडोम नाम दिया गया है, जिसका अर्थ 'साहस' होता है। पार्क में लाइब्रेरी और रिसर्च सेंटर होंगे, जहाँ महिलाएँ विभिन्न विषयों पर आधारित शोध कर सकती हैं।
ऐंटरटेनमेंट और आईटी पार्क तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन क्या कभी किसी जेंडर पार्क के बारे में आपने सुना है? नहीं ना तो अब सुन लीजिए केरल राज्य में इस तरह का एक पार्क बनाने की योजना बनाई जा रही है।
महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत केरल सरकार ने कोझिकोड जिले में जेंडर पार्क बनाने की योजना बनाई है, जहाँ महिलाओं के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। जेंडर पार्क में महिलाओं के लिए रिसर्च प्रोग्राम, जागरूकता शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे आयोजन होंगे, जिनमें पुरुषों की सहायता के बिना महिलाएँ आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ेंगी।
इसमें 100 महिलाओं के रुकने की व्यवस्था वाला गेस्ट हाउस भी होगा, जिससे बड़े कार्यक्रम आयोजित करने में कोई परेशानी न हो। इस पार्क को थानटेडोम नाम दिया गया है, जिसका अर्थ 'साहस' होता है। पार्क में लाइब्रेरी और रिसर्च सेंटर होंगे, जहाँ महिलाएँ विभिन्न विषयों पर आधारित शोध कर सकती हैं। इस पार्क में गैर सरकारी संस्थाएँ भी सहयोग करेंगी।
इस योजना पर अमल करने के लिए राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है। केरल के वित्तमंत्री टीएम थॉमस इसाक इस योजना में खास दिलचस्पी ले रहे हैं और उनके विभाग ने पार्क बनाने के लिए कुन्नामंगलम के पास छह एकड़ जमीन भी तय कर ली है।

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष