March 21, 2011

रंग बिरंगी दुनिया

113 साल पुराना केक

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी वैडिंग केक को 113 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है? जी हां आज दुनिया का सबसे पुराना वैडिंग केक अभी भी बरकरार है। एक शताब्दी से भी ज्यादा समय पहले वर्ष 1898 में बनाए गए इस केक को देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं। इस केक को देखने के बाद ऐसा लगता है मानों इसे अभी- अभी बनाया गया हो।
क्वीन विक्टोरिया के शासन काल में बनाए गए इस केक की आइसिंग का सफेद हिस्सा अब भूरा हो गया है, और द्वितीय विश्व युद्ध में हुए एक बम धमाके के कारण इस केक में एक बड़ी दरार भी आ गई है। लेकिन कहते हैं कि इसके भीतर का हिस्सा अभी भी नम हैं!
इस केक को तैयार किए जाने के बाद 1964 तक इसे एक बेकरी में रखा गया था। बेकरी बंद हो जाने के बाद केक बनाने वाले बेकर की बेटी ने मरने से पूर्व इस केक को हैंट्स केबेसिंगस्टोक स्थित विलिस म्यूजियम को दे दिया था।
कहानी जो बन गई हकीकत
यह एक अनोखा संयोग ही है कि 20 साल पहले लिखी एक काल्पनिक कहानी हकीकत बन गई। 19 वीं शताब्दी के मशहूर अमेरिकी लेखक एडगर एलेन पो ने द नरेटिव आफ आर्थर गार्डन पिम शीर्षक से एक रोमांचक कहानी लिखी थी। इस कहानी में चार लोग जहाज से कहीं जा रहे होते हैं कि अचानक उनका जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। वे कई दिनों तक भटकते रहते हैं। उनके पास का खाना खत्म हो जाता है। जब वे भूख से परेशान हो जाते हैं तब वे जहाज के केबिन ब्वाय रिचर्ड पार्कर को ही मार कर उसके मांस से अपनी भूख मिटाने की योजना बनाते हैं।
आश्चर्यजनक बात यह है कि इस किताब के लिखे जाने के कुछ दशकों बाद 1884 में सच में ही एक ऐसी ही घटना घटती है। होता यूं है कि चार लोग एक जहाज में यात्रा कर रहे होते हैं। उनका जहाज भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है और वे एक टूटी हुई नाव में कई दिनों तक समुद्र में भटकते रहते हैं। अंत में जब भूख उनसे बर्दास्त नहीं होती तो वे जहाज के केबिन ब्वाय को मार कर खा जाते हैं। चौंका देने वाली बात ये है कि जिस लड़के का वे शिकार करते हैं उसका नाम भी रिचर्ड पार्कर ही था जो उस जहाज का केबिन ब्वाय था।
यह उस जहाज की सच्ची कहानी है जिसे मिगनोटे नाम दिया गया था। इस जहाज को बनाने का मकसद आस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ के रहस्य और संसाधनों को खोजना था। जहाज के कैप्टन टॉम डडले थे जबकि उनके दो अन्य साथी एडविन स्टीफेंस और एडमंड ब्रुक्स उनके साथ जा रहे थे। और उनका चौथा सहयात्री था रिचर्ड पार्कर।
शादी के सात वचन
भारतीय परंपरा के अनुसार शादी के सात फेरे लेते वक्त सात वचन लिए जाते हैं जिसमें से एक है हमेशा एक दूसरे का साथ निभाने का वचन। दूसरे देशों में भी शादी के समय जिंदगी भर साथ निभाने के वादे किए जाते होंगे। ऐसी ही कसम को पूरी करते हुए एक महिला ने अपनी जान पर खेलकर अपने पति को बा के हमले से बचाया। ये दम्पति उत्तरी मलेशिया के एक जंगल क्षेत्र के रहने वाले हैं। आश्चर्य तो यह कि इस महिला ने खाना बनाने वाले लकड़ी के एक बड़े चम्मच से बाघ का सामना किया।
कुआलालम्पुर में टैंमबुन गीडच्यू पिछले दिनों जंगल के निकट जहाई कबीले में स्थित अपने घर के पास गिलहरियों का शिकार कर रहा था जब बाघ ने उस पर हमला किया। टैमबुन की 55 वर्षीय पत्नी हैन बीसाऊ ने जब उसकी चीखें सुनी तो वे जल्दी से बाहर आईं। उस समय उनके हाथ में लकड़ी का बड़ा चम्मच ही था। उसने उसे ही बाघ के सिर में घोंप दिया। बस फिर क्या था बाघ वहां से भाग निकला। इसके बाद टैमबुन को जल्दी से अस्पताल ले जाया गया। उसके चेहरे और टांगों पर चोटें आई थीं।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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