June 05, 2010

किताबें

गंभीर विषय  की गहन पड़ताल

वेद हिन्दू धर्म, हिन्दुतत्व एकलव्य प्रकाशन की एक महत्वपूर्ण किताब है। इस पुस्तक के मूल लेखक हैं कुमकुम राय, कुणाल चक्रबर्ती और तनिका सरकार। पुस्तक का अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद स्वयं प्रकाश ने किया है।
हिन्दू धर्म में लगातार आ रहे बदलावों के साथ वर्तमान में धर्म के साथ खिलवाड़ हो रहा है साथ ही उसको हथियार बनाकर उसका राजनीतिकरण कर दिया गया है। इस तरह हम अपनी ही सांस्कृतिक धरोहर को शंका की दृष्टि से देखने लगे हैं। ऐसे में यह जरुरी हो जाता है कि वास्तविक स्थिति को सामने लाया जाए। कुछ ऐसी ही वास्तविकताओं को सामने लाने का प्रयास है यह पुस्तक। इस पुस्तक में तीनों लेखकों के क्रमश: एक- एक निंबंध संकलित हैं- 1. वैदिक युग की खोज में 2. स्मृति, पुराण, हिन्दू धर्म 3. हिन्दुत्व। लेखक अपने-अपने क्षेत्र के सम्मानित इतिहासकार हैं और उन्होंने वेद हिन्दू धर्म, हिन्दुतत्व जैसे गंभीर विषय की गहन पड़ताल की है ।
रोमिला थापर ने भूमिका में बिल्कुल सही कहा है कि वेदों के बारे में कुछ धारणाएं प्रचलित हैं जो अल्प परिचय या सुनी-सुनाई बातों पर आधारित होती हैं। अतीत के बारे में ऐसे बयानों और वर्तमान के साथ उनके संबंध का इतिहासकारों को परीक्षण करना चाहिए और देखना चाहिए कि उनमें कोई दम है या नहीं। प्रस्तुत पुस्तक में तीनों लेखकों ने अपने गहन अध्ययन के आधार पर इन्हीं सब जवाबों को तलाशने की कोशिश की है।
यह पुस्तक निश्चित ही उन जिज्ञासुओं पाठकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी जो वेद, हिन्दू धर्म और हिन्दुतत्व के बारे में और अधिक व सही जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। एकलव्य संस्था भोपाल से प्रकाशित इस पुस्तक में विषय से संबंधित चित्रों का भी समावेश किया गया है। पुस्तक का मुखपृष्ठ विषय के अनुरुप आकर्षक है तथा छपाई भी साफ सुथरी है। कीमत है मात्र 45/-रुपए।
स्वैच्छिक संस्था एकलव्य जो शिक्षा एवं जनविज्ञान के क्षेत्र में कार्य करती है तथा समय समय पर इससे संबंधित किताबें एवं पत्रिकाएं भी प्रकाशित करती हैं। बच्चों की पत्रिका चकमक और स्रोत फीचर्स एवं शैक्षणिक संदर्भ उनके नियमित प्रकाशन हंै।
99 साल पुरानी गलती सुधारी
ऑस्ट्रेलिया में भौतिकीशास्त्र के एक प्रोफेसर के इंगित करने पर विश्वविख्यात शब्दकोष ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को अपनी 99 साल पुरानी गलती सुधारनी पड़ी।
क्वींसलैंड यूनीवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के लेक्चरर स्टीफन ह्यूजेस ने एक शोधपत्र तैयार करने के दौरान ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में वर्णित 'साइफन' शब्द की परिभाषा को गलत पाया।
दुनिया के सबसे अच्छे शब्दकोषों में गिनी जाने वाली ऑक्सफोर्ड में यह गलती पिछले 99 वर्षों से दोहराई जा रही थी।
'हेराल्ड सन' की रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने साइफन की प्रक्रिया के लिए वातावरणीय दबाव को प्रमुख कारक बताया था, जबकि दरअसल यह प्रक्रिया गुरुत्वाकषर्ण बल की वजह से होती है। साइफन को आमतौर पर पेट्रोल टैंक खाली करने में इस्तेमाल किया जाता है।
ह्यूजेस ने ऑक्सफोर्ड के सम्पादकों को इस गलती को लेकर ई-मेल भेजा, जिसकी रिवीजन टीम ने कहा कि यह गलती सुधारी जाएगी।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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