April 19, 2010

क्या पुन: जीवित हो सकेगी एलीफैन्ट बर्ड

आपने हाथी चिडिय़ा (एलीफैन्ट बर्ड) का नाम सुना है? नहीं? तो यह जान लीजिए कि हाथी चिडिय़ा वास्तव में तीन सौ वर्ष पहले तक एशिया और अफ्रीका के बीच समुद्र से घिरे द्वीप मैडागास्कर की धरती पर विचरती थी। दस फीट ऊंची विशालकाय यह हाथी चिडिय़ा उडऩे में असमर्थ थी। वे शाकाहारी थीं और जंगल में प्राप्त फल, फूल, पत्तियां खाया करती थी। इस विलक्षण पक्षी के लुप्त होने का प्रमुख कारण था समुद्री नाविकों द्वारा उनके मांस के लिए बेहिसाब शिकार। लेकिन खोजी वैज्ञानिकों ने गुफाओं और चट्टानों में दबे फंसे हाथी चिडिय़ा के 13 इंच लंबे और 3 फीट गोलाई वाले अंडो के खोल ढूंढ़ निकाले हैं।

आस्ट्रेलिया के मरडाक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक का दावा है कि उन्होंने हाथी चिडिय़ा के अंडे के खोल से डीएनए निकालने की विधि खोज ली है अत: उनका विश्वास है कि हाथी चिडिय़ा का पुर्नजन्म संभव है। तो क्या जुरासिक पार्क फिल्म की रोमांचित करने वाली कल्पना को साकार करने की ओर यह पहला
कदम है?

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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