April 19, 2010

किताबें

मां पर केंद्रित अंक

डॉ. परदेशी राम वर्मा द्वारा संपादित अव्यवसायिक त्रैमासिक पत्रिका अगासदिया अपने आरंभिक काल से लेकर किसी न किसी विशेष विषय पर केंद्रित रहती है, जो छत्तीसगढ़ की संस्कृति, साहित्य एवं लोककला पर आधारित होती है। आगासदिया का जुलाई- सितंबर 2009 का अंक मां पर केंद्रित किया गया है। जिसमें संपादक ने अपने समकालीन मित्रों और वरिष्ठ जनों से आग्रह कर मां पर उनके विचारों को लिपिबद्ध करवाया है। अंक में उनके अपने कुछ लेखों के साथ गजानन माधव मुक्तिबोध, आचार्य सरोज द्विवेदी, आनंद मूर्ति आत्मानंद, डॉ. खूबचंद बघेल, पं. श्यामाचरण शुक्ल, संत पवन दीवान, केयूर भूषण, श्यामलाल चतुर्वेदी जैसे म के संस्मरण तथा उनके समकालीन मित्रों के आलेख, कहानी, कविता भी शामिल हैं। भिलाई दुर्ग से प्रकाशित इस विशेष अंक की कीमत 150/- रुपए है।
बच्चों की समस्याएं
श्री प्रकाशन दुर्ग छत्तीसगढ़ से प्रकाशित पुस्तक बच्चों की हरकतें प्रो. अश्विनी केशरवानी द्वारा 1980 से 2000 तक विभिन्न पत्रिकाओं जैसे धर्मयुग, नवनीत तथा अनेक समाचार पत्रों में प्रकाशित बच्चों पर केंद्रित उनके 27 लेखों का संकलन है। इन लेखों के माध्यम से प्रो. केशरवानी ने जन्म लेने से लेकर बच्चों के पालन- पोषण, संस्कार, आदतें, माता-पिता की जिम्मेदारी, शिक्षा जैसे मनोवैज्ञानिक प्रश्नों के साथ बाल मजदूरी जैसी समस्या को भी उठाया है। किताब की कीमत 150/- रुपए है।
तपती धूप में...
गम में भीगी खुशी और चरागे दिल के बाद देवी नागरानी का यह तीसरा गज़ल संग्रह है। देवी नागरानी के गज़लों में संवेदना और भाषा की काव्यात्मकता के साथ जीवन के विभिन्न उतार चढ़ाव का समावेश होता है। गज़ल कहने की अपनी अलग शैली के कारण उनकी गजलों की रंगत कुछ और हो जाती है।
'हमें पहुंचाये मंजिल तक, कोई ऐसी डगर देना,
जो तपती धूप में साया घना दे, वो शज़र देना।'
जिंदगी की जटिलताओं के बीच अपने संघर्ष का इजहार करने के लिए देवी गजलों का सहारा लेती हैं। गज़लों में उन्होंने सुनामी जैसी घटनाओं पर भी लिखा है-
'सुनामी ने सजाई मौत की महफिल फिजाओं में
शिकारी मौत बन कर चुपके- चुपके से कफन लाया।'
संयोग प्रकाशन मुम्बई से प्रकाशित किताब की कीमत 150/-रुपए है।

0 Comments:

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष