April 19, 2010

मानव दूध से बना पनीर!

पिछले दिनों एक ब्लाग पर दिलचस्प सूचना पढऩे की मिली। जिसमें एक दम्पत्ति ने मानव दूध से बने पनीर बेचने की सूचना प्रसारित की है। डेनियल एन्गरर और उनकी पत्नी लोरी मेसन न्यूयार्क के मनहट्टन क्षेत्र में एक रेस्तरां चलाते हैं। हाल में लोरी ने एक शिशु को जन्म दिया तो उन्होंने पाया कि शिशु को पिलाने के बाद भी उनके दूध की बड़ी मात्रा बची रहती थी, जिसे वे बोतलों में भरकर फ्रीजर में सुरक्षित रखने लगीं। जब फ्रीजर ठसाठस भर गया तो प्रश्न उठा कि इस मानव दुग्ध का क्या किया जाए? लोरी और उनके पति ने निर्णय लिया कि इस का पनीर बना कर बेचा जाए। उन्होंने मानव दुग्ध से बने पनीर की सूचना अपने ब्लाग पर प्रसारित कर दी है। जाहिर है बहुत से लोग मानव दूध से बने इस पनीर का स्वाद लेने को इच्छुक होंगे। अब यह जानकारी तो पनीर बेचने वाले दम्पत्ति ही दे पाएंगे कि मानव दुग्ध से बने इस पनीर की कितनी मांग है और वे इसकी पूर्ति कर पा रहे हैं या नहीं।
वे नहीं जानती थीं वे गर्भवती हैं!
दो अलग- अलग घटनाओं में इन दो महिलाओं को पता ही नहीं था कि वे गर्भवती हैं, जब उन्होंने अपने- अपने बच्चे को जन्म दे दिया तब कहीं वे जान पाईं कि नौ माह तक वे अपने गर्भ में बच्चे को पाल रही थीं।
पहली घटना में अमरीका के केन्टुकी प्रांत की 32 वर्षीया महिला को प्रसव के अंतिम समय तक पता ही नहीं चला कि वे गर्भवती हैं। हुआ यूं कि एक दिन वे घर पर अकेली थीं और वाशिंग मशीन में कपड़े धो रही थी कि तभी उन्हें पेट में दर्द महसूस हुआ और उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया। इतना ही नहीं महिला ने स्वयं ही बच्चे की नाल काटी और अपने अभी अभी जन्में पुत्र को लेकर दिनचर्या के कामों को निपटाने के लिए निकल पड़ीं। स्वयं ही कार चलाती हुई सबसे पहले अपने बड़े बच्चे के स्कूल पहुंची क्योंकि तब उसके स्कूल की छुट्टी का समय हो गया था। स्कूल से बड़े बच्चे को लेकर यह साहसी महिला अपनी सास के घर गई और उन्हें उनका नवजात पोता दिखाया। यह सब काम खत्म करने के बाद ही वह कार से दोनों बच्चो के साथ अस्पताल पहुंची।
इसी प्रकार दूसरी घटना इग्लैंड की हेयर ड्रेसर 21 वर्षीया बैलिन्डा वेट की है। बैलिन्डा पिछले 9 महीने से लगातार पेट में जलन की शिकायत लेकर अस्पताल जाती थी जहां डॉक्टर उनकी जांच करके दवाई देते रहे थे, लेकिन बेलिन्डा को उनकी दवाई से कोई फायदा नहीं हुआ। परंतु कुछ दिन पहले ही जब एक डॉक्टर ने उनकी जांच करके उन्हें बताया कि वह पूरे 9 महीने की गर्भवती हैं। यह सुनकर भौंचक्की बेलिन्डा जब अपने घर, जहां वह अपने प्रेमी के साथ रहती हैं, पहुंची तो तीन घंटे बाद ही उसे प्रसव पीड़ा हुई। और फिर बेलिन्डा ने अपने प्रेमी की मां की सहायता से एक साढ़े आठ पाउंड वजन की स्वस्थ पुत्री को जन्म दिया।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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