January 19, 2009

रंग बिरंगी दुनिया

सोलर कार में 52 हजार कि.मी. का सफर

सौर ऊर्जा से कार चलाकर स्विट्जरलैंड के एक अध्यापक लुई पाल्मर ने दुनिया को यही संदेश दिया है कि अब समय आ गया है कि हमें अपने पर्यावरण को बचाने के लिए के लिए ईंधन से चलने वाली गाडिय़ों के विकल्प के बारे में सोचना शुरु कर देना चाहिए। पिछले दिनों वे सौर ऊर्जा से कार चलाकर दुनिया के लगभग 40 देशों का दौरा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र के पौलैंड में जलवायु परिवर्तन पर हो रहे सम्मेलन में पहुंचे थे। अपनी तीन पहियों वाली सोलर कार से लुई नेे 17 महीनों में 52 हजार किलोमीटर की यात्रा की है।

उनका कहना है कि सौर ऊर्जा तेल और उससे पैदा होने वाली ऊर्जा का विकल्प है। पाल्मर का दावा है कि इससे ग्लोबल वॉर्मिंग यानी पृथ्वी के बढ़ते तापमान की समस्या का हल निकालने में मदद मिल सकती है। उन्होंने अपनी कार की विशेषता के बारे में बताया कि उन्हें इस वाहन से 52 हजार किलोमीटर की यात्रा के दौरान केवल दो बार कार की मरम्मत करनी पड़ी। वे कहते हैं कि यदि इसका औद्योगिक स्तर पर उत्पादन करना है तो इसमें कई परिवर्तन करने होंगे। फिलहाल इस दो सीटों की छोटी सी कार के पीछे एक ट्रेलर है, जिसमें सूरज की किरणों से चार्ज होने वाली बैटरी रहती है और एक बार चार्ज किए जाने के बाद ये कार तीन सौ किलोमीटर चल सकती है। यह कार यह 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक चल सकती है।.... तो अब लुई के इस साहासिक प्रयास के बाद कार निर्माताओं को इस दिशा में सोचना शुरु तो करना ही पड़ेगा।

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                                       अनोखा क्लब अनोखे सदस्य

दुनिया सचमुच रंग बिरंगी है, जहां अनोखे लोगों की कमी नहीं हैं। जैसा कि सभी जानते हैं क्लब, इंग्लैंड के समाज और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प अंग होता है साथ ही वहां क्लब की सदस्यता सामाजिक प्रतिष्ठा का भी अनिवार्य अंग है। प्रत्येक क्लब की एक खास विशिष्टता होती है जैसे किसी क्लब के सदस्य एक विशेष नस्ल के कुत्तों के प्रेमियों का होता है तो कोई क्लब भाप से चलने वाले रेल इंजनों का शौकीन होता है।

इंग्लैंड में ऐसा ही एक अनोखा क्लब है जिसके सदस्य वही लोग हो सकते हैं जिन्होंने जीवन में कभी किसी संकटग्रस्त वायुसेना के विमान से छतरी से कूदकर अपनी जान बचाई हो। इस क्लब का नाम है 'इंजेक्शन टाई क्लबÓ है और इस समय इसके सदस्यों की संख्या 5607 है जिसमें सिर्फ 20 प्रतिशत ही अंग्रेज हैं, शेष सदस्य विश्व के अन्य देशों से हैं। क्लब की सदस्यता पाने के भी बड़े ही कड़े नियम हैं यहां सदस्यों के विवरण गुप्त रखे जाते हैं क्योंकि इनमें से बहुत से अभी भी वायु सेनाओं में कार्यरत हैं। इस क्लब के महिला सदस्यों की संख्या सिर्फ 10 है। इस अनोखे क्लब का सदस्य होने के लिए तो पैराशूट से कूदना पड़ेगा।


                                  35 साल खोई अंगूठी का मिलना
                                               
अपनी किसी खास वस्तु को खोने पर हर किसी को दुख होता है परंतु खोई वस्तु जब दोबारा मिल जाती है तो सुखद अहसास होता है। लेकिन कैरी विलियम्स की खुशी ठिकाना नहीं रहा जब एक चर्च में 35 साल पहले गुम हुई उनकी अंगूठी वापस मिल गई। कैरी को वह दिन आज भी याद है जब वेल्स मोरियाह के एक चर्च में उनकी सोने की अंगूठी अंगुली से फिसलकर फर्श की दरारों में खो गई थी। सिर्फ 15 दिन पहले यह अंगूठी उन्हें उनके मां-बाप ने गिफ्ट में दी थी। काफी खोजने के बाद भी जब अंगूठी नहीं मिली तो उन्होंने उसे पाने की अपनी सारी उम्मीदें छोड़ दी। और उस घटना को घटे 35 साल गुजर गए।

लेकिन अभी हाल ही में वह उसी चर्च के पास से गुजर रही थी तो उसने देखा कि उस चर्च को गिराया जा रहा जहां कभी उसकी अंगूठी खो गई थी। बस फिर क्या था उन्होंने चर्च को गिरा रहे ठेकेदारों को अपनी पूरी कहानी सुनाई। ठेकेदारों के लिए वह अंगूठी खोजना जोखिम भरा काम था फिर भी उन्होंने कैरी को यह कहकर लौटा दिया कि हम अंगूठी खोजने की कोशिश करेंगे।

पर किस्मत देखिए चर्च के फर्श की खुदाई कर रहे एक मजदूर को वह अंगूठी मिल गई। उन्होंने फौरन कैरी को यह खुशखबरी दी। कैरी के बच्चे डाइलन और इवान ने बताया कि इस अंगूठी के साथ मां की बहुत सी यादें जुड़ी हैं। अंगूठी पाकर बेहद खुश कैरी ने कहा कि अब मैं दोबारा इसे कभी नहीं उतारूंगी।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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