December 14, 2013

हाइकु

                 हरसिंगार
                                       
                                  - नलिनीकान्त

1
स्वर्ण कलश
शीश पर ले खड़ी
उषा कुमारी।

2
उषा रानी का
सुहाग का सिंधौरा
ललका गोला।

3
श्लोक पे श्लो
पढ़ रहे पखेरू
भिनसार से।

4
आसमान पर
इतनी कविताएँ
छापी किसने!

5
धन्य चन्दन
जिधर से रगड़ो
देता सुगन्ध।

6
किस सीढ़ी से
अँगना में उतरी
किरण  परी?

7
बूढ़े नीम के
शीश पे ललछौंही
फागुनी टोपी।

8
वन-बाग में
खड़े नागा संन्यासी
आया वसन्त।

9
हवा चूमती
तो बोलने लगते
मौन पत्ते भी।

10
बाँध लेती है
भीगे आँचल में माँ
दु:ख का घर।

11
पहन टोपी
लाल, खुशबू बाँटे
हरसिंगार।

12
हीरक -जड़े
झुमके लाल-लाल
बाँटो पलाश।

13
दल के दल
बादल, बजा रहे
जोर माँदल।

14
मीठी मुस्कान
किसी चेहरे का है
इन्द्रधनुष।

15
वर्षा की बूँदें
टीन छत  पे गातीं
मेघ मल्हार।

16
लड़ें बादल
चमकी तलवारें
बिजलियों की।

17
पहाड़ों पर
देखो बना रहे
मेघ झोंपड़ी।

18
भूखे जनों को
नेता देते बधाई
खा के मलाई।

19
हरसिंगार
पहन टोपी लाल
चले बारात।

20
सरस्वती है
छिपी लुप्त नदी-सी
ढूँढ़ो अन्दर।

21
झाऊ वन में
लेटी है चाँदनी
चितकबरी

22
लाल है फ़्रॉक
दुपट्टा भी है लाल
उषा के गात।

23
सठिया गए
बच्चे, भूले जब से
परी-कथाएँ।

 लेखक के बारे में- जन्म -1-7-1925, स्थान-बन्दनहार, सन्ताल परगना, झारखण्ड विविध विधाओं की 17 पुस्तकें प्रकाशित, ‘कविता श्री’ मासिक का 46 वर्ष तक सम्पादन।
सम्पर्क: कविताश्री प्रकाशन, उत्तर बाज़ार, अण्डाल ( पश्चिमी बंगाल)-713 321 फोन- 9474699126

1 Comment:

Rama said...

बहुत सारगर्भित ,भावपूर्ण अभिव्यक्ति।\ .... लेखनी को शत-शत नमन ....

डॉ. रमा द्विवेदी

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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