September 10, 2011

वाह भई वाह

चाकलेट
टीचर बच्चों को अच्छी आदतों के बारे में बता रहा था। उसने एक बच्चे से पूछा, अगर गलती से तुम्हारा पैर एक वृद्ध महिला पर पड़ जाए, तो क्या करोगे?
बच्चा - सॉरी बोलूंगा।
टीचर- बहुत अच्छा, अगर वह खुश होकर तुम्हें चाकलेट दे, तो फिर तुम क्या करोगे?
बच्चा (तपाक से)- तो मैं दूसरे पैर पर चढ़ जाऊंगा, ताकि मुझे एक और चाकलेट मिले।
बेहोश
सब्जी वाला सब्जी को ताजा रखने के लिए उस पर पानी छिड़क रहा था।
काफी देर हो गई तो बोर होकर एक खरीददार ने सब्जी वाले से कहा, तुम्हारी सब्जियां होश में आ गईं हों तो मुझे एक किलो टमाटर दे दो भाई।
चार जुआरी
चार व्यक्तियों को अदालत में पेश किया गया। इल्जाम था कि वे पार्क में बैठे जुआ खेल रहे थे। मजिस्ट्रेट ने बारी- बारी से सवाल पूछे। पहले ने कहा, मैं उस दिन यहां था ही नहीं। सबूत के तौर पर अपने ट्रेवल एजेंट से रेल टिकट की रसीद दे सकता हूं। दूसरा बोला- उस दिन मैं घर पर बुखार में पड़ा था। डॉक्टर का सर्टिफिकेट पेश कर सकता हूं। तीसरे का जवाब था - मैंने आज तक कभी जुआ नहीं खेला, ताश को हाथ तक नहीं लगाया। चौथा चुपचाप खड़ा रहा। जब उससे पूछा, और तुम भी जुआ नहीं खेल रहे थे -वह बोला- जी, मैं अकेला जुआ कैसे खेल सकता हूं?

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