July 12, 2011

हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो

- शास्त्री जे.सी. फिलिप
कई दशाब्दियों से रेलगाड़ी यात्रा मेरे लिये जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। इन यात्राओं के दौरान कई खट्टे- मीठे अनुभव हुए हैं, जिनमें मीठे अनुभव बहुत अधिक हैं। इसके साथ- साथ कई विचित्र बाते देखने मिलती हैं जिनको देखकर अफसोस होता है कि लोग किस तरह से विरोधाभासों को पहचान नहीं
पाते हैं।
उदाहरण के लिये निम्न प्रस्ताव को ले लीजिये: बी इंडियन, बाई इंडियन। यह प्रस्ताव अंग्रेजी में या हिन्दी में अकसर दिख जाता है। अब सवाल यह है कि इसे सीधे सीधे भारतीय अनुवाद में क्यों नहीं दे दिया जाता है। 'हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो' (जो इस अंग्रेजी वाक्य का भावार्थ है) हिन्दी में कहने में हमें तकलीफ क्यों होती है। हिन्दुस्तानियों को हिन्दुस्तानी बनाने के लिये एक विलायती भाषा की जरूरत क्यों पड़ती हैं?
दूसरी ओर, जब 'बी इंडियन, बाई इंडियन' लिखा दिखता है तो कोफ्त होती है कि यह किसके लिये लिखा गया है? अंग्रेजीदां लोग तो इसे पढऩे से रहे क्योंकि उनकी नजर में तो हिन्दी केवल नौकरों, गुलामों की भाषा है। आम हिन्दी भाषी जब इसे पढ़ता है तो उसके लिये इसका भावार्थ समझना आसान नहीं है। उसे लगता है कि यहां खरीद- फरोख्त की बात (बाई Buy) हो रही है।
जरा अपने आस- पास नजर डालें। कितने विरोधाभास हैं इस तरह के। कम से कम दो- चार को सही करने की कोशिश करें।
(सारथी से)

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