December 25, 2010

संयुक्ता ने सिखाया दिल से

प्रस्तुत किताब 'सीखना ...दिल से' स्कूल की पढ़ाई पूरी करके निकली संयुक्ता नाम की उस लड़की की कहानी है जो कॉलेज में पढ़ाई के परंपरागत ढांचे से अलग हट कर अपनी रूचि के अनुसार पढ़ाई करने का फैसला लेती है और इसमें सफल भी होती है।

आंध्र प्रदेश के एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी संयुक्ता उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे चूहा दौड़ से बचने का निर्णय लेती है। वह कालेज की बोरिंग पढ़ाई को सालों- साल झेलने के बजाए अपनी खुद की उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम निर्धारित करती है, जो उसके दिल और दिमाग दोनों के अनुकूल हो।
अपने दिल की बात मानकर संयुक्ता आगे की जितनी भी और जैसी भी पढ़ाई करती है, उसके इसी सफर को बयान करती है यह किताब। जो कहती है सीखना ऐसे कि जिसमें दिल भी साथ हो।
संयुक्ता की यह किताब उन बच्चों और उनके माता- पिता के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगी जो ऐसा सोचते हैं कि परंपरागत उच्च शिक्षा पाकर ही बड़ा ओहदा, बड़ी नौकरी हासिल की जा सकती हैं। और उनके लिए भी जो अपने बच्चे को जबरदस्ती ऐसी पढ़ाई करने पर जोर डालते हैं जिनकी उस विषय विशेष में रूचि ही नहीं होती।
यह किताब सभी युवाओं को कॉलेज की पढ़ाई छोडऩे की राह बताएगी कहना भी गलत होगा परंतु संयुक्ता के अनुभव उन युवाओं को एक नया रास्ता जरुर दिखा सकते हैं जो परंपरागत पढ़ाई के स्थान पर अपने दिल से कुछ अलग कुछ अनोखा करने का सपना देखते हैं। (उदंती फीचर्स)
पुस्तक: सीखना दिल से
लेखक: संयुक्ता, अनुवाद: भरत त्रिपाठी
प्रकाशक: एकलव्य,
ई-10 बीडीए कॉलोनी, शंकर नगर, शिवाजी नगर,
भोपाल 462 016, मूल्य: 80.00 रुपये
www.eklavya.

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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