December 25, 2010

आपके पत्र/ मेल बॉक्स



सागर सा गहरा
उदंती के माध्यम से पाठकों तक जो जानकारी पंहुचती है वह दुर्लभ है। रोटी खाते ही शेरू बन गया अछूत आज की जातिवादी और सड़ी- गली वर्ण व्यवस्था वाली सोच का तालिबानी और कुरूप चेहरा है। प्रेमवन तो अनुकरणीय है, पर लुटेरा प्रशासन उसमें भी बाधा ही बनता है। नारे दीवारों की शोभा बनकर रह जाते हैं। मुक्तिबोध की कहानी पढऩे का अवसर मिला केवल उदंती के कारण। सभी के लिए कुछ न कुछ सागर -सा गहरा है, इस उदंती के गागर में। अनावश्यक सामग्री है ही नहीं। आपको इतना परिमार्जित अंक निकालने के लिए बधाई।
- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
rdkamboj@gmail.com
आज के साहित्यकार ?
उदंती का ताजा अंक मिला। साज- सज्जा बहुत आकर्षक है सदैव की तरह। विचार सामग्री भी रोचक और विविधतापूर्ण है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उभरते सवालों तथा कालजयी रचनाओं को साहित्य के माध्यम से बखूबी संजोकर रख रही हैं। आपके इस प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। वैसे तो आज साहित्यकार खेमे में बंटे हुए हैं, आत्ममुग्धता का भाव ओढ़े हुए सामाजिक चिंतन से विमुख अथवा उधारी की सोच से ग्रस्त दिखते हैं। इस दृष्टि से उदंती का कार्य मार्गदर्शी है, प्रेरणास्पद है।
-ब्रिजेन्द्र श्रीवास्तव, ग्वालियर, मो. 09425360243
brijshrivastava@rediffmail.com
अच्छी पहल
हिंदी सिनेमा के बारे में तो हर जगह पढऩे को मिल जाता है, पर क्षेत्रीय सिनेमा पर मैटर ढूंढऩा मुश्किल हो जाता है। उदंती की अच्छी पहल के लिए बधाई।
- नव्यवेश नवराही, जालंधर, navrahi@gmail.com
प्रशंसनीय कार्य
रॉक गार्डन की तर्ज पर रश्मि सुंदरानी द्वारा दुर्ग में कबाड़ का जो उपयोग किया गया है वह प्रशंसनीय है। उनसे प्रेरणा लेते हुए कबाड़ का यदि इसी तरह शहर के सौन्दर्य वृद्धि में उपयोग कर लिया जाए तो सरकार और शहरवासियों दोनों की समस्याओं का समाधान होगा। इसी तरह दीनानाथ द्वारा की गई पहल भी सराहनीय है। अगर निजी तौर पर व्यक्ति ऐसे उदाहरण पेश करता रहे तो पर्यावरण को बनाए रखने में आसानी होगी।
- पूजा शुक्ला, रायपुर (छ.ग.)
मार्गदर्शी दीपकों की दिव्य ज्योति
उदंती के अक्टूबर अंक में अनकही के लिए बधाई देना चाहता हूं - मूल्यहीनता के इस युग में आप की खोज- मूल्य रक्षा की है। आज हमारे समाज का दुर्भाग्य है कि मीडिया इन महानताओं को महत्व नहीं दे रहा है। ये घटनाएं यदि औरों के लिए उदाहारण बन सके तो अंधेरे के खिलाफ ये रोशनी के दिए आशा जागते हैं ।
- सुरेश यादव, नई दिल्ली
sureshyadav55@gmail.com
जाग्रत समाज के बूते ही इस तरह की सामाजिक समस्याएं दूर हो पाएंगी।
-लोकेन्द्र सिंह राजपूत, ग्वालियर म.प्र.
www.apnapanchoo.blogspot.com
ओय ओय.... गिर गया
उदंती के अक्टूबर अंक में प्रमोद ताम्बट का सटीक व्यंग्य मानो कह रहा है ... ओय ओय ... सुरेश कलमाड़ी गिर गया और अब तो सचमुच गिर गया है, बच नहीं पाया है। सभी रचनाएं बेहतरीन, ताजातरीन, सार्थक अंक।
- अविनाश वाचस्पति, नई दिल्ली मो.09868166586
avinashvachaspati@gmail.com
छत्तीसगढ़ में रेजीमेंट
डॉ. परदेशीराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ में रेजीमेंट बनाए जाने को लेकर जो सवाल उठाए हैं उस विषय को गंभीरता से लेते हुए विचार किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद ने अब सारी हदें पार कर ली है।
- राजेश साहू, राजनांदगांव (छ.ग.)

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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