November 23, 2008

आपके पत्र

समाचार चैनलों का प्रदूषण

अक्टूबर अंक में प्रकाशित विकल्प ब्यौहार ने च् हंसी का पिटारा बनते हमारे न्यूज चैनल को चाहिए सिर्फ सनसनीज् के माध्यम से इलेक्ट्रानिक मीडिया के सच को उजागर किया है। आज के समाचार चैनल 24 घंटे मनोरंजन को समाचार के रूप में परोसते हैं। सभी हिंदी समाचार चैनल में इन दिनों 50 प्रतिशत से अधिक समय अपराधों के समाचार दिखाए जाते हैं। लगता है कि जैसे हमारे समाज की मुख्य क्रिया अपराध-सेक्स सनसनी और स्कैंडल ही हैं। सबसे ज्यादा ध्यान देने की बात यह है कि टेलीविजन रखने वाले 99 प्रतिशत से अधिक घरों में एक ही टेलीविजन होता है जिसे वयस्क और बच्चे साथ-साथ ही देखते हैं। अपराधों को मिर्च मसाला लगाकर प्रस्तुत करने का क्या प्रभाव बच्चों और किशोरों के मस्तिष्क पर पड़ता है यह सभी को पता है। किशोर वर्ग की अपरिपक्व मानसिकता का इस प्रकार का निरंतर प्रसारण समाज के लिए बहुत ही घातक है। अत: आवश्यक है कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग को समाचार चैनलों द्वारा फैलाये जा रहे इस प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और इसके लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था की स्थापना करने प्रयत्न करना चाहिए, जिससे कि ऐसे घातक प्रसारणों पर रोक लगाई जा सके।

-अशोक, फतेहगढ़ (उ. प्र.) से


पत्रिका में छत्तीसगढ़ दिखाई दे रहा है

दुनिया के नक्शे पर छत्तीसगढ़ जैसी छोटी सी जगह से वेब पत्रिका का प्रकाशन जैसा महत्वपूर्ण काम हो रहा है, उसके लिए बधाई। पत्रिका में छत्तीसगढ़ दिखाई दे रहा है यह अच्छी बात है। और अधिक अच्छी बात यह भी है कि छत्तीसगढ़ के जन- जीवन और सांस्कृतिक परिदृश्य को जानने में यह पत्रिका एक महत्वपूर्ण कार्य काम कर सकती है, जिसकी झलक इसके पहले अंक से ही दिखने लगी है। बधाई।

-विजय गौड़, देहरादून से
(संपादक -लिखो यहां वहां ब्लाग पोस्ट)


यूं ही प्रवाहित होती रहे

उदंती का सितंबर और अक्टूबर अंक, दोनों बहुत बढिय़ा। छत्तीसगढ़ के लिए यह पत्रिका एक सौगात लेकर आई है। पत्रिका में प्रस्तुत रचनाएं तो पठनीय हैं ही साथ ही पत्रिका की छपाई उसका प्रस्तुतिकरण भी बहुत ही आकर्षक एवं कलात्मक है। मेरी शुभकामना है कि उदंती की धारा यूं ही प्रवाहित होती रहे।

-श्रिया, रायपुर (छ. ग.) से

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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