November 23, 2008

अनकही- सभ्यता और संस्कृति


जिस प्रकार साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है उसी तरह सभ्यता और संस्कृति से किसी भी देश या समाज की पहचान बनती है। भारत में सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर आज तक उसकी संस्कृति अविरल प्रवाहित होती चली आ रही है। यहां की उन्नत भाषा, रीति रिवाज, परंपराएं, कलाएं आदि इसका प्रमाण हैं।
सभ्यता किसी समाज के आचरण या व्यवहार को कहते हैं तथा यह बौद्धिक होती है, जैसे कृषि, व्यापार- उद्योग, निर्माण कार्य आदि जबकि संस्कृति समाज की आकांक्षाएं होती हैं और इसका संबध भावनाओं से होता है जैसे गीत, संगीत, शिल्पकला, चित्रकला आदि। इस तरह हम सभ्यता और संस्कृति को एक दूसरे से अलग करके नहीं देख सकते, दोनो एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और साथ- साथ चलती हैं।
सभ्यता और संस्कृति की बात चल रही हो तभी ऐसी खबर मिल जाए जो हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित करती हों तो मन के कोने में आशा की किरण जगती है। ये सभी खबरें शुभ की सूचक हैं और उम्मीद की जानी चाहिए कि बदलाव की जो बयार बह रही है वह हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को और अधिक उन्नत करेगी।
पहली अच्छी खबर है कि - गंगा नदी, जो भारतीय संस्कृति की जननी है और जिसके किनारे भारतीय सभ्यता और संस्कृति पल्लवित पुष्पित हुई है, को केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय नदी घोषित करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। भारतवासियों के लिए गंगा उनकी मां है, पूज्यनीय है और वह सबके हृदय में सदा ही बसी रहती है। विश्वास है ऐसी जीवनदायी नदी को उसी श्रद्धा के साथ संरक्षित तथा प्रदूषण रहित करने की दिशा में बेहतर प्रयास किए जाएंगे।

- दूसरी महत्वपूर्ण और संगीतमय खबर है, पंडित भीमसेन जोशी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की। पंडित जी के कंठ में सरस्वती विराजती है अत: उनका यह सम्मान हम भारतीयों के लिए गर्व की बात है। पंडित जी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमूल्य सेवा की है। वे चिरायु हों, उनकी स्वर लहरियां गूंजती रहे यही शुभकामना है ।
- और अंतत: इतिहास रचते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी के 47 वर्षीय बराक हुसैन
ओबामा अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुन लिए गए। उनकी यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि अमरीका में काले लोगों को वोट देने का अधिकार 1964 में मिल पाया था, जबकि अमरीका को आजादी 1776 में ही मिल गई थी। ओबामा ने जीत के तुरंत बाद अपने पहले संबोधन में कहा कि यह नेतृत्व का नया सवेरा है , जो लोग दुनिया को ध्वस्त करना चाहते हैं उन्हें मैं कहना चाहता हूं कि हम तुम्हें हराएंगे। जो लोग सुरक्षा और शांति चाहते हैं हम उनकी मदद करेंगे। अब्राहिम लिंकन को याद करते हुए उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि लोगो की सरकार, लोगो के लिए सरकार और लोगों के द्वारा सरकार दुनिया से गायब नहीं हुई है। इस ऐतिहासिक जीत पर उन्हें बधाई।
अप्रत्यक्ष रुप से ये तीनों खबरें हमारी संस्कृति और सभ्यता को प्रभावित करने वाली हैं, अत: दुनिया और देश में हो रहे सामाजिक- सांस्कृतिक बदलाव की इस ताजी हवा का स्वागत किया जाना चाहिए। बदलाव प्रकृति और समाज का नियम है, प्रकृति के बदलते मौसम के अनुसार हमें अपनी जीवन चर्या को सजाते- संवारते तथा पूरी निष्ठा से अपनी युगों की पुरानी संस्कृति और सभ्यता को पुष्ट करते रहना चाहिए। यही मानव धर्म है।

-रत्ना वर्मा

1 Comment:

दीपक said...

आपकी कही अनकही अत्यंत अच्छी लगी !! सभ्यता और संस्कृति का मर्म जानकर खुशी हुयी !

लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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