August 15, 2008

सुर्खियां...

अभिनव तूझे सलाम...
28 सितंबर, 1982 को जन्में 23 वर्षीय शूटिंग स्टार अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफ़ल शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और भारतीय युवाओं के लिए एक मिसाल बन गए ।1980 के बाद भारत ने पहला स्वर्ण पदक जीता है। इसके पहले भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक मिला था। अभिनव ने ओलंपिक के 112 वर्षों के इतिहास में पहली बार भारत की ओर से किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया है। अपने लक्ष्य के लिए संकल्पित अभिनव ने बारह साल की उम्र में ही राइफ़ल थाम ली थी और तभी रोपड़ जि़ला निशानेबाज़ी चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया था। अभिनव का अचूक निशाना देखकर उनके कोच लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस ढिल्लो ने पहले ही कह दिया था कि निशानेबाज़ी में अभिनव भारत का नाम रोशन करेंगे। ओलंपिक तक का सफऱ उनकी कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है। अभिनव बचपन से ही बंदूकों से खेलते थे। देहरादून में पैदा हुए और चंडीगढ़ में पले- बढ़े अभिनव जब पाँच साल के थे तभी से उनकी रुचि निशानेबाजी थी। अभिनव की इस रूचि को देखकर उसके माता- पिता ने उसे बढ़ावा दिया और उसके लिए बेहतर खेल का महौल तैयार किया। इसका नतीजा रहा कि अभिनव बिंद्रा वर्ष 2000 में सिडनी ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी बने। इसके बाद उन्होंने 2001 में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छह स्वर्ण पदक, 2002 में मैनचेस्टर में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में रजत पदक जीता। अभिनव ने 2004 में ओलंपिक का रिकॉर्ड तो तोड़ा पर मेडल लेने से चूक गए। एक शूटर होने के अलावा अभिनव ने एमबीए किया है। इस समय वे फ्यूचरिस्टिक कंपनी के सीईओ हैं। उन्हें सन् 2001 में अर्जुन पुरस्कार तथा राजीव गाँधी खेल रत्न भी मिल चुका है।
अमिताभ के स्वर में गूंजेंगे गांधी के भजन

शीघ्र ही बाजार में एक ऐसा संगीत अलबम आने वाला है जिसमें महात्मा गांधी के प्रिय भजन संकलित हैं। इनमें से एक भजन 'ओ नम्रता के सागर' तो स्वयं महात्मा गांधी की रचना है। महात्मा गांधी द्वारा रचित इस दुर्लभ भजन के अस्तित्व के बारे में गांधी परिवार को भी कोई जानकारी नहीं थी। सर्वविदित है कि जीवन के अंतिम कुछ वर्षों में महात्मा गांधी बिरला परिवार के अतिथि रहे थे और वे दिल्ली स्थित बिरला हाउस में ही शहीद हुए थे। इसी बिरला भवन में बिरला परिवार को तीन वर्ष पहले अचानक यह भजन मिला। अब आदित्य बिरला समूह ने यह निर्णय किया है कि इसे सुरूचिपूर्ण ढंग से जनता को भेंट किया जाना चाहिए इस प्रकार यह विशिष्टï अलबम प्रस्तुत किया जा रहा है। इसकी खास बात यह है कि दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक इल्लायाराजा के संगीत निर्देशन में बने इस अलबम में महात्मा गांधी द्वारा रचित भजन 'ओ नम्रता के सागर' को अमिताभ बच्चन के स्वर में प्रस्तुत किया जा रहा है। अन्य भजन पं. भीमसेन जोशी, पं. अजय चक्रवर्ती और परवीन सुल्ताना से गवाये गये हैं। साथ में प्रसिद्ध संगीत निर्देशक स्वर्गीय नौशाद की कमेन्ट्री भी सुनाई देगी ।


विश्व में पहली बार
जर्मनी में डाक्टरों ने एक चमत्कार करके दिखा दिया। विश्व में पहली बार म्यूनिख शहर के डॉक्टरों ने छह वर्ष पहले एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ गंवा चुके 54 वर्षीय किसान के हाथों का प्रत्यारोपण करने में सफलता पाई है। एक व्यक्ति की मृत्यु के दो घंटे बाद कोहनी से उसके दोनों हाथ काटकर इस किसान के हाथों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया गया। पूरे विश्व ने इस चमत्कार को अजूबा कहा, पर यह अजूबा मेडिकल साईंस का कमाल है। अब उस किसान को अपने दोनों हाथ फिर से मिल गए हैं। अपनी दिनचर्या को सुचारु रुप से इन हाथों के जरिए करने में उसे दो वर्ष लगेंगे। क्योंकि उसकी उंगलियों में स्पंदन आना धीरे- धीरे आरंभ होगा। अब एक और नई कहावत बनेगी लूले को क्या चाहिए दो प्रत्यापित हाथ।


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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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