July 12, 2011

आपके घर से निकलने वाले प्रदूषण का पता लगायेगी मशीन

गर्मी से निपटने के लिए एसी और सर्दी से निपटने के लिए हीटर ये चीजें हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं। हमें इन्हें इस्तेमाल करते समय इस बात का एहसास नहीं होता कि हमारी ये जरूरतें पर्यावरण के लिए कितनी हानिकारक हंै। अगर हमें कोई ऐसी चीज मिल जाए जिसे देख कर यह पता लग सके कि हर दिन हम पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शायद इनकी खपत को कम कर सकें।

घर में बिजली और पानी की खपत का रिकॉर्ड रखने के लिए मीटर लगाए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक नए प्रस्ताव के बाद अब ऐसे भी मीटर लग सकेंगे जो पूरी इमारत में कुल ऊर्जा की खपत का पता लगा सकेंगे। गर्मी से निपटने के लिए एसी और सर्दी से निपटने के लिए हीटर ये चीजें हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं। हमें इन्हें इस्तेमाल करते समय इस बात का एहसास नहीं होता कि हमारी ये जरूरतें पर्यावरण के लिए कितनी हानिकारक हैं। अगर हमें कोई ऐसी चीज मिल जाए जिसे देख कर यह पता लग सके कि हर दिन हम पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शायद इनकी खपत को कम कर सकें। संयुक्त राष्ट्र ने एक ऐसी ही तकनीक को मंजूरी दी है। यह मीटर यह भी बताएंगे कि उस इमारत से पर्यावरण में कितना कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित हुआ है।
क्या है कार्बन मेट्रिक
कार्बन मेट्रिक नाम की इस तकनीक पर काम कर रही संयुक्त राष्ट्र की मारिया एटकिंसन बताती हैं, 'कार्बन मेट्रिक का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि इमारतों के मालिकों को इस बारे में पता चल सके कि वे ऊर्जा की कितनी खपत कर रहे हैं और वातावरण में कितनी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन हो रहा है। वे जान सकें कि क्या मैं सीमा में रह कर खपत कर रहा हूं या वातावरण को नुकसान पहुंचा रहा हूं।'
यूरोपीय देशों में बिजली और पानी के अलावा तेल की भी काफी खपत होती है। सर्दी होने के कारण यहां सेन्ट्रल हीटिंग होती है। अधिकतर तो एयर कंडिशनर की तरह ये भी बिजली से ही चलते हैं, पर कई जगह इसके लिए तेल का भी इस्तेमाल होता है। इसी तरह एशियाई देशों में खाना पकाने के लिए एलपीजी गैस का इस्तेमाल किया जाता है।
कितना होगा खर्चा
इस नई तकनीक में ऊर्जा की इस तमाम खपत का हिसाब लगाया जाएगा। हर घर कितना कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित कर सकता है, इसके लिए एक सीमा तय की जाएगी। लेकिन इसे लागू करने के लिए नई इमारतें बनानी होंगी। इंजीनियर और आर्किटेक्ट्स को इस पर मेहनत करनी होगी।
हालांकि कई लोगों का मानना है कि इस पर बहुत ज्यादा खर्चा आ सकता है। पर संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम के लिए काम कर रहे अरब होबअल्लाह इस धारणा को गलत बताते हैं, 'लम्बे समय से लोग यह मानते आए हैं कि यदि आपको एक ऐसी इमारत का निर्माण करना है जिसमें ऊर्जा की खपत कम की जा सकती है तो आपको उसमें इतना पैसा लगाना पड़ेगा कि यदि आप ऊर्जा बचाते भी हैं तब भी वह आपको महंगा ही पड़ेगा, लेकिन अब इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स और बिल्डरों की मदद से हमने नई तकनीक पर काम किया है और हमने यह बात गलत साबित कर दी है।'
छोटी छोटी बातें
होबअल्लाह का कहना है कि इसके अलावा लोगों को छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि ऊर्जा की खपत को कम किया जा सके। ठंडे देशों में खिड़कियां ऐसी दिशा में बनाई जाए जहां से धूप सबसे अधिक आती हो और गर्म देशों में ऐसी दिशा में जहां छाया रहती हो। 'आप हर जगह एक ही तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आप अगर सोचें कि जर्मन तकनीक को बुर्किना फासो ले जाएंगे और वहां भी उसी रफ्तार से काम करेंगे तो ऐसा तो नहीं हो सकता, लेकिन बुर्किना फासो जा कर यह तो समझा ही सकते हैं कि इमारतों पर शीशे लगाना कम कर दें तो एयर कंडिशनर की खपत कम हो सकेगी।'
सीमा से अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड विसर्जित करने पर लोगों को कार्बन क्रेडिट खरीदने होंगे। कार्बन क्रेडिट यानी पैसा दे कर और कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की अनुमति खरीदनी होगी। इस तरह का सिस्टम कारखानों के लिए पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है। अब इसे घरों पर भी लागू किया जाएगा।

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