July 12, 2011

पिछले दिनों

अंजलि जोसेफ को 'बेट्टी ट्रास्क' अवार्ड
मुंबई में जन्मी लेखिका अंजलि जोसेफ को 'बेट्टी ट्रास्क' अवार्ड से नवाजा गया है। उन्हें उनकी रचना 'सरस्वती पार्क' को लेकर इस पुरस्कार से नवाजा गया है। पुरस्कार की राशि 10,000 पाउंड है। अंजलि की कहानी सरस्वती पार्क मुंबई उपनगरीय इलाके के एक आवासीय परिसर की कहानी है। गौरतलब है कि यह पुरस्कार राट्रमंडल के किसी सदस्य देश के 35 साल से कम उम्र के लेखक को उनकी पहली रचना के लिए दिया जाता है।
डेमी मूर ने बनाई वृत्तचित्र फिल्म
डेमी मूर ने नेपाल में होने वाली मानव तस्करी को लेकर जागरूकता के लिए इस देश पर एक वृत्तचित्र फिल्म बनाई है। गुलामी और मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाले मूर ने इसे रोकने के लिए अपने पति एश्टन कचर के साथ 'डेमी एंड एश्टन (डीएनए) फाउंडेशन' बनाया है। मूर ने वृत्तचित्र फिल्म के लिए पिछले साल 'सीएनएन हीरो ऑफ द ईयर' अनुराधा कोइराला से मुलाकात की थी। उन्होंने कोइराला से चर्चा कर पूछा था कि वह उन महिलाओं की किस तरह मदद कर सकती हैं जिन पर वेश्यावृत्ति के लिए दबाव बनाया जाता है। वृत्तचित्र को 'नेपाल्स स्टोलन चिल्ड्रन' नाम दिया गया है। सीएनएन की 'फ्रीडम' परियोजना के तहत मूर ने तस्करी की शिकार अनेक महिलाओं से मुलाकात की थी।
ग्रामीणों ने पहाड़ काटकर बनाई 10 किमी. लंबी सड़क
सासाराम (बिहार) के रोहतास जिले के लोगों ने रोहतासगढ़ किले तक जाने के लिए खुद ही पहाड़ काटकर 10 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कर लोगों के सामने एक मिसाल पेश किया है।
मुख्यालय से रोहतास किले की दूरी करीब 50 किलोमीटर थी। इस सड़क के बन जाने से अब किले की दूरी मात्र 20 किलोमीटर रह गई और अब वहां मोटरगाड़ी तक आराम से पहुंच जाती है।
कभी डकैतों और फिर नक्सलियों का आरामगाह माने जाने वाले कैमूर पहाड़ी पर स्थित रोहतास किले तक जाने के लिए कोई सड़क न होने से लोगों का यहां आवागमन करीब- करीब बंद ही हो गया था।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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