May 24, 2010

किताबें

छत्तीसगढ़ के पुरोधा

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के इतिहास और उसके नवजागरण में उसकी भूमिका को सामने लाने के उद्देश्य से कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय तथा माधवराव सप्रे पत्रकारिता शोधपीठ की संयुक्त परिकल्पना में छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता- हमारे पुरोधा खण्ड- 1 का प्रकाशन संभव हो सका है। इसमें नई पीढ़ी को हमारे पुरोधा पत्रकारों के विषय में संक्षिप्त जानकारी के साथ उनके योगदान, उनका जीवनवृत्त एवं उनके कार्य को सम्मिलित किया गया है। प्रथम खंड में पंडित माधवराव सप्रे, पं. रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल, पदुमलाल पुन्नालाल बक्शी, कुलदीप सहाय, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव केशव प्रसाद वर्मा, गंजानंद माधव मुक्तिबोध, पं. स्वराज्य प्रसाद द्विवेदी, चंदूलाल चंद्राकर, मायाराम सुरजन और हरि ठाकुर को शामिल किया गया है।
इस प्रकाशन का उद्देश्य भारतीय पत्रकारिता के संपूर्ण इतिहास में छत्तीसगढ़ के योगदान की मुक्कमल पहचान को रेखांकित करना है ताकि शोधार्थी उनके जीवन और कृतित्व पर शोध के लिए प्रेरित हो सकें। पत्रिका का संपादन माधवराव सप्रे पत्रकारिता शोधपीठ के अध्यक्ष परितोष चक्रवर्ती ने किया है।
स्वागत है मिजबान
किस्से- कहानी कहना और सुनना पुरातन काल से ही भारतीय संस्कृति की समृद्घशाली परम्परा रही है। अभी ज्यादा समय नहीं बीता है कि जब हमारे ग्रामीण अंचलों में सांझ ढलते ही गांव के किसी बुजुर्ग की चौपाल पर बैठकें जम जाया करती थीं और चल पड़ता किस्से और कहानियों का लम्बा दौर जिसमें पता ही नहीं चलता था कि आधी रात कब हो गई। लेकिन अब ये बातें स्मृतियां बनती जा रही हैं। इन स्मृतियों को संजोने का प्रयास एकलव्य संस्था द्वारा किया गया है, मिजबान के रूप में। मिजबान बुन्देलखंडी लोककथाओं का संकलन है जिसमें मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में प्रचलित बुन्देलखंडी लोककथाओं में से 12 कहानियों को चुना गया है। इन कहानियों में बहुत से स्वाद हैं और सभी पढऩे वाले को आकर्षित करते हैं। इन कहानियों को अतनु राय के चित्रों ने बेहद सजीव बना दिया है।
प्रकाशक- एकलव्य, मूल्य- 30 रुपए।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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