May 24, 2010

टमाटर देख भागेंगे मच्छर

शीर्षक पढ़कर चौक गए ना!

जी हां यह बिल्कुल सत्य है। टमाटर में एक ऐसा यौगिक पाया गया है जो मच्छरों को भगाने के लिए ज्यादा कारगर और मनुष्यों के लिए ज्यादा सुरक्षित है। यह तो जग जाहि है कि मलेरिया और डेंगू जैसी भयानक बीमारियों से बचने के लिए मच्छर के काटने से बचना अत्यंत जरूरी है। मच्छर ही मलेरिया के विषाणु को मनुष्यों तक पहुंचाता है।
डॉक्टरों ने मच्छर भगाने के लिए इस्तेमाल होनेवाली ज़्यादातर क्रीम, लोशन या छिड़कने वाली दवाओं में शामिल रसायन 'डीट' को मनुष्यों के लिए गंभीर रूप से हानिकारक माना है। अमरीकी पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी उन क्रीम, लोशन को बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं मानती और उन वस्तुओं के इस्तेमाल से रोकती है जिनमें यह दवा शामिल होती है। लेकिन अब अमरीका के नॉर्थ कैरोलाइना विश्विद्यालय ने इसी काम के लिए टमाटर में पाया जान वाला यह यौगिक ढूंढ़ निकाला है जो कम विषैला है।
तो अब तो मानना ही पड़ेगा टमाटर के इस कमाल को-
यह भी सिद्ध हो ही चुका है कि टमाटर के पौधे में कीड़े-मकौड़ों को भगाने की प्राकृतिक क्षमता होती है।
कैरोलाइना के कीट विज्ञान विभाग के डॉक्टर माइकल रो ने इसी पौधे का सत लेकर परीक्षण किया कि क्या मच्छरों पर भी उसका कोई विशेष असर होता है।
डॉक्टर माइकल रो ने पाया कि मच्छरों से बचने में यह काफ़ी कारगर साबित हुआ। इसके अलावा, आईबीआई-246 नाम के इस यौगिक का प्रयोग श्रृंगार प्रसाधनों में काफी होता है इसलिए यह भी सिद्ध होता है कि यह हानिकारक नहीं है।
विश्वविद्यालय ने तो टमाटर में पाए गए इस यौगिक का पेटेंट भी करवा लिया है और एक जैव तकनीक कंपनी इसका प्रयोग नए उत्पादनों में करने जा रही है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे बने उत्पादन अगले साल के अंत तक बाजार में आ जाएंगे।
डॉक्टर रो का कहना है कि यह यौगिक टमाटर में मिलता है, जो जैविक है, कम हानिकारक है और कम से कम 'डीट' जितना कारगर भी है।
लोगों को मच्छरों के आतंक और मलेरिया जैसी बीमारी से लडऩे के लिए ऐसे ही कीट रोधी की जरूरत थी। अब देखना यह होगा कि टमाटर से बनी मच्च्छर भगाने वाली इस क्रीम को भारत आने में कितना समय लगेगा क्योंकि इस खोज का पेटेंट करवा लिया गया है अत: भारत में टमाटर का भरपूर उत्पादन होने के बावजूद इस दवा को यहां पर बनाया भी नहीं जा सकेगा।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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