September 23, 2009

रोबोट पकाता है जायकेदार व्यंजन

हालीवुड मूवी आई-रोबोट और टर्मिनेटर तो आपने देखी ही होगी। इन फिल्मों का रोबोट भी आपको अच्छी तरह याद होगा। ऐसे रोबोट जिनकी सिर्फ आप कल्पना कर सकते हैं, लेकिन ऐसे रोबोट, अब कल्पना नहीं रह गए हंै। आने वाले 50 साल में फ्रिज, टीवी, कंप्यूटर की तरह रोबोट घर-घर की जरूरत हो जाएंगे। और तब आपके घर के लिए रोबोट सब्जी लाएगा, कपड़े धोएगा, आपके बच्चों के साथ खेलेगा, घर की रखवाली करेगा और आप आराम से बैठकर अपनी मनपसंद सीरियल देख रहे होंगे।
काम रोबोट करेगा और उसका कंट्रोल आपके हाथों में होगा। ये सच है कि अब ऐसे रोबोट आ गए हैं जो इंसानी जरुरतों को पूरा करें। चीन को ही लीजिए गुआनग्सी प्रांत के नैनिंग में एक ऐसा रेस्तरां है जहां रसोइए का काम रोबोट संभालते हैं। इस अनोखे रेस्तरां को आई रोबोट रेस्तरां के नाम से जाना जाता है।
रेस्तरां के प्रबंधक हुआंग जियागो ने दो रोबोट को 50 हजार पौंड (करीब 40 लाख रुपये) में खरीदा है। उन्होंने बताया कि दोनों को खाना बनाने में महारत हासिल है। वे चीन के 100 से ज्यादा लजीज पारंपरिक व्यंजन बना सकते हैं। इतना ही नहीं कोई भी डिश बनाने में इन्हें सिर्फ दो से तीन मिनट का समय लगता है। हुआंग ने बताया कि ग्राहकों को साफ सुथरी और अच्छी सर्विस देने में इनसे काफी मदद मिल रही है। सबसे अच्छी बात है कि वे कभी शिकायत नहीं करते।
कंप्यूटर में संचित डाटाबेस की मदद से इन्हें संचालित किया जाता है। इस डाटाबेस में सैकड़ों व्यंजनों की मेन्यू और उसे तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब कई तरह के काम करने वाले रोबोट तैयार कर लिए गए हैं जिसमें माइक्रो रोबोट दुनिया में ऐसा रोबोट है जो उड़कर अपना कार्य करता है यह इतना छोटा है कि इसे देखने के लिए भी आंखों को परीश्रम करना पड़ता है। इस रोबोट का उपयोग शल्य चिकित्सा तथा माइक्रो अप्लिकेशन के निर्माण में किया जा सकता है।

MicroElectroMechanical Systems (MEMS) नामक यह रोबोट उड़कर अपना रास्ता तलाशता है और चुम्बक की मदद से हवा में तैर सकता है। लेजऱ बीम द्वारा दिशा निर्देश मिलने पर यह रोबोट सटीकता से सही जगह पर छोटे से छोटे यंत्र को फिट कर सकता है। इस रोबोट का उपयोग किसी यांत्रिक वाहन के छोटे- छोटे भागों पर कलपूर्जे लगाने, बायोलोजिक सेम्पल तैयार करने, और बारीक शल्य चिकित्सा में किया जा सकता है।
अमेरिकी इंजीनियरों ने एक और भी कमाल कर दिखाया है-  उन्होंने कपड़े की तरह पहनने वाला रोबोट बना लिया है। अमेरिका की एक्समुवर्स होल्डिंग नामक कम्पनी जो कि इमोशन सेंसिंग अप्लिकेशन बनाने की विशेषज्ञ है ने यह रोबोट बनाया है। कोई भी व्यक्ति इस रोबोट को पहन सकता है। यह एक खोल की तरह होता है, और इसे पहनने वाले व्यक्ति को इसके अंदर घुसना होता है। यह रोबोट स्वयं खड़ा हो सकता है और प्रयोक्ता के नितम्ब और एड़ी की गतिविधियों को पहचान कर उस हिसाब से अपनी गति और दिशा को निर्धारित कर सकता है। इसकी अधिकतम गति 20 किमी प्रति घंटे की है। यह रोबोट अपंग व्यक्तियों के लिए काफी उपयोगी है। क्योंकि इसे पहनने के बाद वे भी आम आदमी की तरह आंख से आंख मिलाकर बात कर पाते हैं। यह रोबोट इसे पहनने वाले व्यक्ति के अंदर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की भावना को भर देता है।
इस समय जो रोबोट हैं, भले ही उनके पास इंसान जैसा दिमाग न हो, कॉकरोच जितना दिमाग तो उसने पा ही लिया है। क्या इसकी कोई सीमा तय की जानी चाहिए? रोबोट को किस सीमा तक दिमाग दिया जाए या फिर कंट्रोल अपने हाथ में कितना रखा जाए।

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष