March 21, 2009

बिल्लियों की किस्मत

मॉय कम्प्यूटर
संभल जाइए आपकी नौकरी खतरे में है... और वह भी एक बिल्ली के कारण ... जी हां यह बिल्ली कम्प्यूटर चलाना जानती है'। यह 'पढ़ी-लिखी' बिल्ली न्यूयॉर्क में हुए वार्षिक 'कैट शो' में शामिल हुई थी। इस मेले में बिल्लियों के लिए सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल और बगीचा भी सजाया
गया था। पालतू जानवरों को टे्रनिंग दे कर बहुत से काम सिखाए जाते हैं, इनमें कुत्ते को सबसे तेज माना जाता है वे बहुत जल्दी इंसानों की सिखाई हुई बातों को सीखता है। बिल्ली भी उसी श्रेणी में आती है। यदि कुत्ते, बिल्ली को इस तरह के काम करना सीखाना शुरु कर देंगे तो इंसान तो बेरोजगार हो ही जाएंगे।

विदेशों में भी शगुन- अपशगुन

विदेशों में भी लोग बिल्ली के रास्ता काट देने को शुभ नहीं मानते। लेकिन कानून तो इन सबसे परे होता है। द हेग में रहने वाले सीस शूरमांस को बिल्ली के रास्ता काटने पर दो मिनट रुकना बहुत मंहगा पड़ा। जब वे अपनी गाड़ी से बाहर जाने के लिए निकले तब टे्रफिक सिग्नल के पास एक बिल्ली ने उनका रास्ता काट दिया, लेकिन वे ग्रीन सिग्नल होने के बाद भी आगे नहीं बढ़े, तब यातायात के नियम तोडऩे के कारण उन पर 75 यूरो (4800 रुपये) का जुर्माना ठोक दिया गया। उनके इस अंधविश्वास ने उनके पीछे चल रहे लोगों को काफी तकलीफ हुई। इसके चलते शूरमांस को 95 डालर (करीब 4500 रुपये) जुर्माना भरना पड़ा। यह खबर उन भारतीयों के लिए खुशखबरी है जो इस तरह की बातों पर विश्वास करते हैं। अब वे यह कह सकते हैं कि हम भारतीय ही अंधविश्वासी नहीं होते।


मूंछों से देखता है चूहा

किन्ही कारणों से जब कोई इंसान अंधा हो जाता है, तो देखने में यह आया है कि मस्तिष्क का वह हिस्सा अन्य कामों में उपयोग होने लगता है। यानी मस्तिष्क का जो हिस्सा सामान्यत: दृष्टि प्रक्रिया के लिए जि़म्मेदार है उसको अन्य संवेदी अंगों से जोड़ दिया जाता है। शायद इसीलिए दृष्टिहीन व्यक्तियों के अन्य संवेदी अंग ज़्यादा पैने हो जाते हैं। अब यह पता चला है कि चूहों के अन्य शारीरिक अंग भी ऐसी स्थिति में स्वयं अनुकूलित हो जाते हैं।

नेशनल ऑटोनामस युनवर्सिटी ऑफ मैक्सिको, मैक्सिको सिटी के गैब्रियल गुटिएरेज़ और उनके सहकर्मियों ने 6 महीने की उम्र के चूहे लिए। इनमें कुछ चूहे नेत्रहीन थे और बाकी आंख वाले थे। शोधकर्ताओं ने इनकी मूंछों की गद्दी (व्हिस्कर पैड) का अध्ययन किया। अपने अध्ययन में उन्होंने पाया कि अंधे चूहों में व्हिस्कर पैड में ऊर्जा का उपयोग बड़ी सावधानी व कार्य क्षमता से किया जाता है और इनके द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र भी काफी अलग ढंग का होता है। प्रोसीडिंग्स ऑफ दी नेशनल एकेडमी ऑफ साइन्सेज़ में प्रकाशित इस परिणाम से लगता है कि इस प्रकार से इन चूहों की मूंछें कहीं अधिक संवेदी हो जाती हैं। इसके परिणास्वरूप ये चूहे छूकर खोजबीन करने में सामान्य से अधिक सक्षम हो जाते हैं।

इस अनुसंधान से इस बात की पुष्टि होती है कि अंधत्व के कारण सिर्फ मस्तिष्क का ही नहीं बल्कि पूरे शरीर का नए ढंग से पुनर्गठन होता है।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही साथी समाज सेवी संस्थाद्वारा संचालित स्कूलसाथी राऊंड टेबल गुरूकुल में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है।
शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से साथी राऊंड टेबल गुरूकुलके बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है।
अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर,तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में),क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर,पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर,जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ।
सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी,रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबाइल नं.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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